मौत से ज्यादा भयभीत दुनियां मौत की आहट से है । वह वर्तमान की समस्या से अधिक आने वाले कल से चिंतित है । हर प्राणी की कमोबेश यही कहानी है वह यही हकीकत है। हम सच्चाई को आत्मसात कर सकें इसकी बङी जरूरत है।हमारे जन्म से पूर्व गर्भावस्था से ही जब शरीर निर्माण की सूक्ष्म प्रक्रिया चलती है, श्वास की भी क्रिया चलती है।हमारा साँस नहीं तो जीवन का अस्तित्व ही नहीं है ।
वह हमारा श्वास कमजोर तो तन-बदन में भी जोर नहीं है । हमारा आयुष्य है जब तक हर पल अविराम सॉंस आती है , सॉंस जाती है । ये सॉंस बहुत पावन हैं और ये अनमोल हैं , जीवन जागृत होने का विश्वास है । वह इससे पहले कि इस नश्वर देह से हमारा नाता आखिरकार टूटे तो हर सॉंस का सदुपयोग करना ही श्रेयस्कर है।
हम यह ध्यान दें कि श्वास जीवन तक पहुँचा रहा है, जीवन-ऊर्जा से सशक्त रख रहा है। वह हमको ताजगी से तरोताजा बनाए रख रहा है। ऐसे मूल्यवान श्वास को दुरुस्त रखना अपने आप के प्रति जागरूक रहना है ।
हमें श्वास जीवित तो रखता ही है, वह हमें चिताओं व तनाव से मुक्त रखने का काम भी सही तरीके से नियंत्रित करने आदि का बखूबी कर सकता है। हम जब भी श्वास के प्रति जागरूक होकर उसके सहारे अपने अंतस की यात्रा पर निकलते हैं तो अतीत और भविष्य से कट कर वर्तमान पल में आ जाते हैं ।
हम ऐसा होते ही खुद को तनाव से मुक्त कर लेते हैं और हमारा हर श्वास-प्रश्वास शांति युक्त आने लगता है । ऐसे मूल्यवान श्वास को दुरुस्त रखना अपने आप के प्रति जागरूक रहना है । इस छोटी सी बात में जीवन का बेशुमार सार है कि श्वास है तो हम हैं श्वास नहीं तो परिवार में भी गम ही गम है। अतः तभी तो कहा गया है कि श्वास ही तो है खास है ।
प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)
यह भी पढ़ें :