आगम व वेद बनाम सार्थक ज्ञान

आगम व वेद बनाम सार्थक ज्ञान

आगम व वेद में धर्म का अखूट खजाना भरा है। आशा के दीप जलते रहे इसके अनेक सूत्र है। 1 महापुरुषों की जीवनी 2 रात कितनी ही लंबी हो प्रभात आयेगा 3 सकारात्मक सोच जैसा चिंतन 4 सत्साहित्य का पठन और सत्संगत आदि । यह सब एक सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है और आत्मा के…

बढे वजन तो क्या करें : एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण

बढे वजन तो क्या करें : एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण

कहते है कि शरीर का वजन बढ़े तो व्यायाम करे और मन का वजन बढ़े तो ध्यान प्राणायाम आदि करे । हमारे जीवन रूपी तुला में दोनों तराजू बराबर होने चाहिये । एक भी कम हुआ तो नुकसान देता है। गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत कहता है कि भार में वजन होता है। भार हटा दो तो…

Be Down To Earth

Be Down To Earth

मानव को अपने जीवन में ऊँचा उठने के लिए अहं से दूर रहकर अधिकाधिक विनम्र होना चाहिये। सबसे बड़ी मानव की पूँजी है अहं से दूर रहना ।जीवन में मैंने आज भी किसी दूसरे से बात कर अनुभव किया है कि मानव जो जमीन से ऊपर उठा है उसमें पैसा होकर भी अहं नहीं आता…

अनुभव जीवन के : Anubhav Jeevan ke

अनुभव जीवन के : Anubhav Jeevan ke

हमारे समझ पकड़ने के बाद की जिन्दगी के कुछ कड़वे – मीठे अनुभव हमेशा सदा याद रहते हैं जो हमारे आगे की जिंदगी के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं यथा जरूरत से ज्यादा सोचने की आदत खुशियों की शहादत कर देती है इसलिये बहुत अधिक सोचते ही मत रहो उचित चिंतन कर काम की क्रियान्विति करो…

तीन तालीम : Teen Taleem

तीन तालीम : Teen Taleem

हमारे जीवन में कभी – कभी कुछ बातें इस तरह दिल में उतर जाती हैं जो हमारे ख़यालात ही बदल देती हैं, जिन्दगी की राह और रफ़्तार ही बदल देती हैं। करते हैं ऐसी ही तीन बातों से उनसे दिल की बात मुलाकात करते हैं। हमारे को किसी से भी बात करनी हो तो फ़ोन…

मर्यादा जुबान की : Maryada Zuban ki

मर्यादा जुबान की : Maryada Zuban ki

जीभ जन्म से होती है और मृत्यु तक रहती है क्योकि वो कोमल होती है । दाँत जन्म के बाद में आते है और मृत्यु से पहले चले जाते हैं क्योकि वो कठोर होते है | पूरे ब्रह्माण्ड में जबान ही एक ऐसी चीज़ है जहाँ पर जहर और अमृत एक साथ रहतें है। अतः…

अनजान भय : Anzan Bhay

अनजान भय : Anzan Bhay

मैंने अपने जीवन में अनुभव किया है कि मानव एक अनजान भय से ग्रसित होता है उसके कारण में मैं जाऊँ तो बहुत कुछ देखने को मिलता है लेकिन उसमे एक महत्वपूर्ण कारण है मानव के स्वयं के किए हुए कर्म वो जानता है मैंने गलत किया है इसलिये वो हर समय एक अनजान भय…

कॉम्प्लिकेटेड हो गई है जिन्दगी : Complicated Zindagi

कॉम्प्लिकेटेड हो गई है जिन्दगी : Complicated Zindagi

इसमें मेरा चिन्तन यह हैं कि जिन्दगी को पेचीदा ( Complicated ) किसने बनाया है ? इसके जिम्मेदार कौन हैं ? आदि – आदि इसका उतर होगा हम स्वयं क्योंकि हमने देखा – देखी में वह और में आदि अपनी जो मूल सभ्यता ,संस्कार, आचरण आदि है उसको दूर – दूर तक छोड़ दिया है।…

यह अहं किस बात पर : Anh Kis Baat ka

यह अहं किस बात पर : Anh Kis Baat ka

मानव का सबसे बड़ा शत्रु कौन ? इसका मेरे चिन्तन से उतर होगा की मैं मानव का सबसे बड़ा शत्रु हैं, जब हम इस दुनिया में आते है तो हमको स्नान कौन करवाता हैं ? जब हम इस दुनिया से जाते है तो हमारे शरीर को शमशान तक कौन ले जाता हैं ? इसका एक…