ADVERTISEMENT ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

कैसे रहें ऊर्जामय सदा

how to stay energetic always
ADVERTISEMENT

हम देखते है कि रात भर के आराम की गहरी निद्रा के बाद ब्रह्म मुहूर्त में जब समय अंगड़ाइयां लेता हुआ जागता है तो वातावरण में स्वत: प्रकृति द्वारा जीवन-ऊर्जा का उत्साह भरने लगता है।

उस ऊर्जा से भरी तरंगों में जब हम अपनी चेतना को सराबोर होने छोड़ देते हैं तो हमारी चेतना को भी ऊर्जा से भरी महसूस करते हैं इसीलिए तो हमारे ऋषि मुनि विशेषत:ब्रह्म मुहूर्त में ध्यानमग्न होते थे और सारे दिन ऊर्जामय रहते थे। हम यदि चाहते हैं कि हमारा दैनिक जीवन उद्देश्यपूर्ण सक्रिय नव दिन हो तो हमें रोज ऊर्जा से भरा जीवन जीना होगा ।

ADVERTISEMENT

हमारा खुश रहना हर काम में, हर बात में सकारात्मकता अपनाना आदि – आदि तब स्वतः ही सहज हो जाएगा । यही तो सफलता की राह पर चलना है ।

हम प्रातः सूर्योदय से पहले उठ कर इष्ट को स्मरण कर दिन की शुरुआत करें। वह साथ ही प्रकृति प्रदत्त शुद्ध वातावरण एवं अनुभूतियों का सुखद अहसास करें ।

हमको वे दिन भर अन्तर में तरंगित करती रहेंगी और मानो मनहर ऊर्जामय संगीत बज रहा हो । हमारा उगते सूरज और खुले आसमान को देखना, कर्णप्रिय विभिन्न आवाजों में नाना पक्षियों का चहचहाना आदि – आदि सारा प्राकृतिक वातावरण, ऊर्जा से ओत-प्रोत कर देता है जो हमको दिन भर सक्रिय रखता है।

यह ऐसा बेशकीमती सुबह का समय हमको लगेगा जो ऊर्जा व आनन्द का अमूल्य खजाना है हमको इसे यूं ही न गँवाना है। आज भी तो प्रातः भ्रमण, शारीरिक व्यायाम, ध्यान, प्राणायाम आदि – आदि ऊर्जा संवर्धन के प्रातः कालीन आयाम माने जाते हैं । हम नित इनका प्रयोग करें वह नव उर्जा का सुयोग पाएँ ।यही हमारे लिए काम्य है ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)

यह भी पढ़ें :

सँवारें अपना भीतरी जीवन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *