दिसम्बर 5, 2022

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आईटी की नौकरी छोड़कर गन्ने का जूस बेचना शुरू किया, हर महीने 7 लाख की हो रही कमाई

आईटी की नौकरी छोड़कर गन्ने का जूस बेचना शुरू किया, हर महीने 7 लाख की हो रही कमाई

आईटी की नौकरी छोड़कर गन्ने का जूस बेचना शुरू किया, हर महीने 7 लाख की हो रही कमाई

आज हम एक ऐसे दंपति कहानी के बारे में जानेंगे जिन्होंने गन्ने के जूस का स्टार्टअप शुरू किया। उन्होंने यह स्टार्टअप अपनी IT की नौकरी छोड़कर शुरू किया था।

यह कहानी है पुणे के रहने वाले मिलिंद और कीर्ति दतार की। यह दंपति 1997 से 2010 तक करीब 13 साल तक कई आईटी कंपनियों में काम किया।

उन्होंने कई बड़े-बड़े आईटी पार्क के ऑफिस में काम किया है। यहां पर रहते हुए वह और उनके सहयोगी चाय और कॉफी के लिए अक्सर कैफेटेरिया जाया करते थे, जहां पर कई तरह के खाने पीने के सामान मिला करता था।

वह अक्सर फैंसी दुकानों की तुलना जूस काउंटर से करते थे। इन जूस काउंटरों पर न तो ज्यादा भीड़ होती थी न ही उन्हें सम्मान दिया जाता था, जितना सम्मान कॉफी दुकानों को दिया जाता है।

तब उन्होंने यह महसूस किया कि गन्ने का रस एक देसी पेय है और यह भी कुछ इसी तरह की परेशानी का सामना कर रहा है।

मिलिंद बताते हैं कि गन्ने का जूस का कारोबार आज भी असंगठित क्षेत्र का कारोबार है। यहां पर साफ सफाई का विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है।

इसलिए कई सालों गन्ने का जूस लेने में कतराते भी हैं क्योंकि साफ-सफाई के अभाव में लोग अपना स्वास्थ्य मुश्किल में नहीं डालना चाहते। इसी बीच उनके दिमाग में एक आइडिया आया जो उनकी पूरी प्रोफेशनल जिंदगी को ही बदल दिया।

ऐसे की शुरुआत

46 वर्षीय मिलिंद बताते हैं कि गन्ने के जूस को लेकर उनके मन में इसका व्यापार करने का विचार आया। यह विचार उनके मन में साल 2010 में आया था, तब उन्होंने अपनी पत्नी के साथ इस पर विचार विमर्श किया।

कुछ सालों बाद दोनों ने मिलकर गन्ने के जूस को स्टार्टअप शुरू करने के बारे में सोचा और उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। इसके लिए Canebot ( कैनबोट ) नाम की कंपनी उन्होंने लांच की। यह वह कंपनी है जहां पर गन्ने का जूस बेचा जाता है।

ऐसे मिली सफलता

अपनी सफलता की यात्रा के बारे में मिलिंद बताते हैं कि जब वह आईटी क्षेत्र में काम किया करते थे तब आईटी सेक्टर में काम करने वाले ज्यादातर लोग गन्ने के जूस के काउंटर पर नहीं जाते थे।

इसकी वजह यह थी कि वहां पर साफ सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता था। तभी से उनके मन में विचार आया कि इस प्राकृतिक और पौष्टिक पेय पदार्थ को बढ़ावा देने के लिए कुछ काम करने की जरूरत है।

मिलिंद और उनकी पत्नी कीर्ति दोनों ही बिजनेस करना चाहते थे। लेकिन उनके पास न तो अनुभव था न ही ज्ञान।

वह बताते हैं कि हमने बाजार में बेचने से लेकर इस बिजनेस से संबंधित सभी परेशानियों को देखा और उन्हें दूर करने के सभी संभावित संसाधनों पर रिसर्च करना शुरू किया।

रिसर्च के दौरान उन्होंने पाया कि लोग इस ड्रिंक को इसलिए नहीं चुनते हैं क्योंकि यहां पर साफ सफाई नहीं रहती है।

इसका एक दूसरा पहलू यह था कि ज्यादातर लोग पारंपरिक गन्ना क्रशिंग मशीन का इस्तेमाल करते थे जो कि लोहे की बनी होती थी और उन धूल और अन्य दूसरों के वजह से सुरक्षित नहीं थी।

सबसे पहले उन्होंने इन समस्याओं को हल करने के लिए एक नई क्रश मशीन को डिजाइन करने का फैसला किया।

मिलिंद बताते हैं कि उन्होंने गन्ने की मशीन पर शोध करने के बाद नवाचार और उत्पाद करने में काफी समय बिताया। जिसका उन्हें फायदा भी हुआ।

नई मशीन के बारे में वह बताते हैं कि इसकी क्षमता पारंपरिक मशीन की तुलना में बेहतर है। वह बताते हैं कि गन्ने का रस निकालने के लिए बार-बार इस मशीन में गन्ने को क्रैश करने की जरूरत नहीं पड़ती थी।

एक ही बार में लगभग 95% तक निकल जाता है। दूसरी बात यह मशीन छोटी है और चलाने में आसान है और इसके ऊपर कवर भी है।

मिलिंद बताते है कि मशीन में कवर होने से यह सुनिश्चित हो गया था कि कवर होने से घूल या बाहर के प्रदूषक इसके संपर्क में नही आ सकेंगे।

इस पूरी प्रक्रिया में समय को पूरी तरीके से कम कर दिया गया था। क्रशिंग यूनिट को स्टेनलैस स्टील में बनाया गया था।

इसके पहले परंपरिक मशीन में यह और अन्य सामग्रियां लोहे की बनाई जाती थी। मिलिंद बताते हैं कि यह नई मशीन सुरक्षा की गारंटी देती है और जिंदगी को बचाती है।

मशीन का स्ट्रक्चर कुछ ऐसे बनाया गया था कि इसे साफ रखने के लिए पानी की जरूरत नहीं होती थी।इस मशीन में इंटरनेट ऑफ थिंग्स प्रतिदिन निकाले गए जूस मात्रा को काउंट करता है।

इंटरनेट के माध्यम से निगरानी और कार्य को आसान बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया क्रश करने से पहले गन्ने को छीलने के लिए मशीन का आविष्कार किया।

मिलिंद बताते हैं कि पारंपरिक प्रक्रिया में गन्ने को हाथ से छीलना पड़ता है। ऐसे में 150 किलो गन्ना छीलने के लिए प्रतिदिन 8 घंटे काम करने वाले 20 मजदूर की जरूरत रहती है।

लेकिन यह मशीन 1 घंटे में 1000 किलो गन्ना आसानी से छील देती है और इस मशीन को चलाने के लिए केवल दो लोगों की जरूरत होती है। इससे उत्पाद की लागत को कम करने में मदद मिली।

इसके बाद दोनों दंपत्ति ने मिलकर महाराष्ट्र में ऐसे किसानों की पहचान करना शुरू किया जो साल भर अच्छी गुणवत्ता वाले सही मात्रा में गन्ने की सप्लाई कर सके।

सारी तैयारी के बाद 2012 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और अक्टूबर में conectar foods pvt. Ltd नामक कंपनी को लांच किया।

 

साथ ही उन्होंने कई आईटी कंपनियों से भी संपर्क कर लिया। समय बीतने के साथ उन्होंने विभिन्न कंपनियों में अपने 12 आउटलेट खोले, जहां पर हुए हर महीने करीब 45,000 गिलास जूस बेचते थे।

पहले वर्ष गन्ने के जूस को बेचने से उन्हें दो करोड़ की कमाई हुई। वह बताते हैं कि पहले साल अच्छी प्रतिक्रिया मिली।

क्योंकि उन्होंने स्वाद, उच्च गुणवत्ता को बनाए रखा था। वह बड़ी सावधानी के साथ गन्ने का चयन करते थे और इससे गन्ने के रस की गुणवत्ता बनाने में मदद मिलती थी।

कठिन दिन का समय

मिलिंद बताते हैं कि जैसे ही उन्होंने अपने स्टार्टअप को फैलाने का विचार किया कोरोना वायरस प्रकोप शुरू हो गया। वह बताते हैं कि उनके सभी आउटलेट आईटी कंपनियों में थे।

ऐसे में रातों-रात उन्हें अपने आउटलेट को बंद करना पड़ा। यह ऐसा चुनौतीपूर्ण दौर था जिसके बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा था।

कीर्ति बताती हैं कि उनकी कंपनी हमेशा आउटलेट्स पर ताजा जूस परोसने पर यकीन करती है। क्योंकि गन्ने का जूस काफी जल्दी खराब होता है।

वह बताती हैं कि लॉकडाउन के कुछ साल पहले उन्होंने डिब्बा बंद गन्ने के जूस को बेचने का प्रयोग किया था। लेकिन यह एक्सपेरिमेंट सफल नहीं हुआ।

तब उन्होंने इसकी सेल्फ लाइक बढ़ाने के लिए प्रिजर्वेटिव्स जैसे चीजों को इस्तेमाल करना शुरू नही किया क्योंकि बिना प्रिजर्वेटिव मिलाएं गन्ने के जूस के प्रेसर्वे करना लगभग असंभव है।

इसके लिए उन्होंने एक प्राकृतिक एजेंट की आवश्यकता महसूस की। कुछ शोध के बाद उन्हें पता चला कि कच्चे आम का रस यानी कि आम पन्ना को अगर गन्ने के रस मिला दिया जाता है तो इसे आसानी से बोटलिंग किया जा सकता है।

कीर्ति बताती हैं कि कच्चे आम का पन्ना पूरे भारत में लोकप्रिय है। यह हेल्दी होता है और प्रकृति पोषक तत्वों से भरपूर रहता है।

हालांकि बहुत सारे लोग इसके सेवन से बचते हैं क्योंकि इसे बनाने में काफी मात्रा में चीनी का इस्तेमाल होता है।

इस दंपत्ति ने सोचा कि क्यों न आम पन्ने में गन्ने का रस मिला दिया जाए तो इससे प्राकृतिक मिठास मिलेगी साथ ही आम का स्वाद भी बना रहेगा।

नई शुरुआत  –

अगस्त 2020 में इस स्टार्टअप ने एनर्जी ड्रिंक गन्ना पन्ना लेकर आया। इसमें गन्ने और कच्चे आम के रस का मिश्रण था और इसे बिना किसी प्रिजर्वेटिव के डिब्बाबंद बेचा जा रहा।

मिलिंद बताते हैं कि हमने हल्दी, कच्चे आम का रस, काली मिर्च और अन्य तत्वों को मिलाकर एक इम्यूनिटी शार्ट भी लांच किया जो कि इम्यूनिटी को मजबूत करने में मददगार है।

इसे बेचने के लिए उन्होंने बिग बास्केट जैसे ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म का चयन किया। आज 230 मिलीलीटर गन्ना आप पन्ना ₹70 मिलता है जबकि 30 मिलीलीटर वाले इम्यूनिटी शॉर्ट्स के 10 यूनिट बॉक्स की कीमत ₹400 रखी गई है।

कीर्ति बताती है कि पुणे में एक अस्पताल और पोषण विशेषज्ञ द्वारा इम्युनिटी ड्रिंक पीने की सिफारिश की गई है। इन दोनों ड्रिंक को canebot ब्रांड के अंतर्गत बेचा जा रहा है।

मिलिंद बताते हैं कि कंपनी ऑफिस को बढ़ाने के लिए डिस्पेंसिंग काउंटर को स्थापित करने के लिए लगातार काम कर रही है।

वह एटीएम मशीन जैसी मशीन लाने की योजना कर रहे हैं जो ग्राहकों तक जूस पहुंचाने में मदद करेगी। इसे हवाई अड्डा, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक जगह पर मांग के अनुसार लगाया जा सकता है।

हालांकि फिलहाल प्राथमिक ध्यान बाजार को फिर से हासिल करने और ई प्लेटफार्म के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच बनाने की है। वह गन्ने के जूस को काफी की तरह ही देश भर में प्रसिद्ध बनाना चाहते है।

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