नवम्बर 28, 2022

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IPS Preeti Chandra : आइए जानते हैं लेडी सिंघम के नाम से मशहूर इस महिला आईपीएस ऑफिसर की सफलता की कहानी

देश में अलग-अलग क्षेत्र में कृतिमान स्थापित करने वाले लोगों को जनता के बीच में एक अलग पहचान दी जाती है अन्यथा सरकार में सरकारी अधिकारी अपनी कलम और ताकत के बल पर ही जाने जाता है, पुलिस सेवा में कई अधिकारी आते हैं और कई चल भी जाते हैं परंतु जनता के बीच पहचान काफी कम अधिकारी ही बना पाते हैं।

आज हम एक ऐसे ही महिला आईपीएस अधिकारी की बात करने जा रहे हैं जिन्होंने ना केवल जनता के बीच में लेडी सिंघम का नाम पाया है बल्कि अपराधियों के खिलाफ सख्ती के लिए एक मिसाल बनकर खड़ी हुई है।

हम बात कर रहे हैं आईपीएस ऑफिसर प्रीति चंद्रा की, आईपीएस ऑफिसर प्रीति चंद्र का जन्म 1979 सीकर जिले के कुंदन गांव में हुआ था। वर्तमान में प्रीति चंद्रा करौली जिले की पुलिस अधीक्षक  हैं। राज्य सरकार के द्वारा वर्ष 2008 में प्रीति चंद्रा को जयपुर मेट्रो कारपोरेशन के पुलिस उपायुक्त के पद से करौली क्षेत्र में  नियुक्त किया गया है।

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि आईपीएस ऑफिसर प्रीति चंद्रा ने पत्रकार से लेकर आईपीएस तक का सफर तय किया है प्रीती चंद्र ने एमए एमफिल तक पढ़ाई की है। प्रीति चंदा कई क्षेत्रों में कई उच्च पदों पर तैनात रही है जैसे अलवर में एसपी एवं कोटा में एसबी अर्थात बूंदी में एसपी एवं अन्य महत्वपूर्ण पदों में तैनात रह चुकी हैं।

जब आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्र बूंदी में एसपी के पद पर तैनात थी तब उन्होंने बूंदी में होने वाले देह व्यापार जहां बच्चियों को धकेलने वाले अपराधियों का खुलासा किया था और सभी आरोपियों को सलाखों तक पहुंचाया अन्यथा इस दौरान ही प्रीति चंद्रा को “लेडी सिंघम” का नाम दिया गया था।

पत्रकार से लेकर आईपीएस अधिकारी तक का सफर

आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्र का कहना है कि कोई भी काम छोटा बड़ा नहीं होता है सभी काम एक जैसे हैं अन्यथा हम जो भी काम को कर रहे हैं हमें उस वक्त यह सोचना चाहिए कि यह काम हम से अच्छा कोई नहीं कर सकता है।

इस दौरान अगर हमारे देश के युवा इस बात को अच्छी तरह से समझ जाए तो हमारा देश काफी अधिक तरक्की कर जाएगा। इस दौरान चंद्रा कहती है कि मैंने जहां पर भी काम किया चाहे वह आईपीएस अधिकारी हो या फिर पत्रकार का पद मैंने हमेशा अपना 100% दिया है।

प्रीति चंद्र बताती है कि जब छोटी थी तो उनकी मां ने कभी भी उनके हाथ में पेंसिल से नहीं पकड़ाई परंतु हम दोनों बहने और एक छोटे भाई को पढ़ने का जुनून था इसलिए हम खुद ही पढ़ाई करते थे ।

प्रीति ने जब कॉलेज की पढ़ाई पूरी की तो घर के रिलेटिव ने शादी का दबाव डालना शुरू कर दिया था परंतु उस वक्त उनकी मां ने उनका सपोर्ट किया और अपने बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया । प्रीति और उसकी बहन ने इंटर कास्ट मैरिज की है जिसमें उसकी मां का पूरा सपोर्ट था।

प्रीति बताती है कि अगर चैलेंजिंग करियर में एक सपोर्ट सिस्टम ना हो तो आगे बढ़ना काफी मुश्किल होता है मेरे पिता के अलावा गांव की एक 22 साल की लड़की ने हमेशा ही मेरा सपोर्ट किया। आगे प्रीति बताती है कि 22 साल की लड़की मैं पढ़ने की इच्छा थी परंतु वह आर्थिक स्थिति
अच्छी न होने के कारण गांव में पढ़ाई नहीं कर पा रही थी ।

इसलिए मैंने उसे अपने साथ रख लिया जब मैं काम से बाहर जाती है तो यह लड़की खुद तो पढ़ाई करती है साथ में मेरी बेटी की जिम्मेदारी भी निभाती है प्रीति बताती है कि मैं अपनी बेटी को किसी रूप से बांधकर नहीं रखना चाहती हूं मैं चाहती हूं कि वह एक खूबसूरत पक्षी की तरह सरहदों को आसमान समझकर उड़ना सीखे।

अपराधियों को पहुंचाया था जेल

आईपीएस अधिकारी प्रीति चंद्रा और उनकी पूरी टीम चंबल के बीहड़ों मैं उतर जाती है इस दौरान वह कई अपराधियों को पकड़वा चुकी है जैसे कि श्रीराम गुर्जर, रामलखन गैंग के श्रीनिवास, आदि 7 से अधिक अपराधियों को पकड़ावा कर वह सरकार द्वारा इनाम भी जीत चुकी है।

आज यह महिला आईपीएस अधिकारी ना केवल देश से अपराधियों का सफाया कर रही है इसके साथ ही साथ कई महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन रही है।

लेखिका : अमरजीत कौर

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