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Wednesday, March 3, 2021

कभी गलियों में भीख मांगने के लिए थे विवश, आज खड़ा कर लिया है 40 करोड़ का कारोबार

कहा जाता है कि सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जिनके पास ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए ऊंची सोच के साथ-साथ ऐसे उद्देश्य के लिए उनका पक्का इरादा और उसे प्राप्त करने के लिए हार न मानने वाला जज्बा होता है।

अगर इस तरह के जज्बे के साथ आगे बढ़ा जाता है तो सफलता सुनिश्चित होती है। इसी जज्बे के साथ आगे बढ़ते हुए 50 साल के Renuka Aradhya ने यह साबित कर दिया कि गरीबी और अभाव किसी को सफल होने से नही रोक सकती हैं।

एक वक्त था जब Renuka Aradhya अपने पिता के साथ गांव-गांव गली-गली जाकर भीख मांगते थे, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बदौलत ही आज उन्होंने 40 करोड़ का कारोबार स्थापित कर लिया है।

भारत की आईटी राजधानी के रूप में जाने जाने वाले बेंगलुरु के पास स्थित एक गांव से ताल्लुक रखने वाले Renuka Aradhya की कहानी बेहद संघर्ष भरी है, जिससे लोग प्रेरणा लेकर कामयाबी पा सकते हैं।

इनका बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। वे एक बेहद गरीब पुजारी परिवार में जन्मे थे। इन्हे जिंदगी में कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना किया है।

pravasi Cab Logo

इनके घर की हालत इतनी बुरी थी कि इन्हे अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए दूसरे घर मे नौकर के रूप में काम भी करना पड़ता था।

दसवीं तक की पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद Renuka Aradhya एक बूढ़े अनाथ व्यक्ति के घर पर रहकर उसकी सेवा करने लगे, साथ ही पास के मंदिर में पुजारी का काम भी करते थे।

यह सिलसिला लगभग एक साल तक चलता रहा। इसके बाद अपनी पढ़ाई को पूरा करने के उद्देश्य से Renuka Aradhya के पिता ने उनका नामांकन शहर के एक आश्रम में करवा दिया।

उस आश्रम में उन्हें सिर्फ दो बार सुबह के समय 8 बजे और शाम के समय 8 बजे ही खाना खाने को मिलता था। पूरे दिन भूखे रहने की वजह से Renuka Aradhya ठीक ढंग से पढ़ाई भी नही कर पाते थे।

नतीजा यह हुआ कि वह परीक्षा में असफल हो गए और मजबूरी मे उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। घर वापस आते ही Renuka Aradhya के पिता इस दुनिया से चल बसे और घर की सारी जिम्मेदारी रेणुका पर आ गई।

Renuka Aradhya ने घर चलाने के लिए काम ढूढना शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद उन्हें पास के ही एक फैक्ट्री में काम मिल गया। लगभग एक साल तक उन्होंने फैक्ट्री में काम किया।

इसके बाद वे एक दूसरे फैक्ट्री, जो कि प्लास्टिक और बर्फ बनाने की कंपनी थी वहां काम करने लगे। इसके बाद वह बैग की ट्रेडिंग करने वाली एक कंपनी में भी काम किये।

celebarating birth day in his office
celebarating birth day in his office

इस तरह दिन-ब-दिन उन्हें कारोबार का अनुभव होने लगा और बाद में वह खुद एक ऐसे धंधे की शुरुआत किये जिससे वह गरीबी से उबर सके।

उन्होंने पहले सूटकेस कवर का व्यापार शुरू किया। लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें अपने इस व्यापार में तीन लाख का नुकसान हुआ।

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इसके बाद फिर से रेणुका सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करने लगे लेकिन उनके जीवन में हमेशा से जीवन में कुछ बड़ा करने की ललक थी।

इसी के चलते Renuka Aradhya ने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छोड़ दी और ड्राइविंग सीखे। अपने रिश्तेदारों से कुछ पैसे उधार लेकर रेणुका ने ड्राइविंग का काम सीखना शुरू कर दिया।

लेकिन इस बार भी किस्मत उनके साथ नही थी एक बार पार्किंग के दौरान कार से टक्कर हो जाती है। लेकिन इस बार भी रेणुका हार नही मानते और दिन-रात ड्राइविंग की प्रैक्टिस कर के एक सफल ड्राइवर बन गये।

कुछ दिनों बाद उन्होंने एक Travel Agency  ज्वाइन की और वहां पर बतौर ड्राइवर काम करने लगे। इस ट्रेवल एजेंसी में वह विदेशी पर्यटकों को घुमाने का काम करते थे जिससे उन्हें अच्छी टिप्स भी मिल जाया करती थी।

करीब 4 साल तक बतौर ड्राइवर उन्होंने काम किया इसके बाद उन्होंने खुद की एक ट्रेवल कंपनी खोलने का विचार किया।

अपनी खुद की सेविंग और बैंक से कुछ मदद लेकर उन्होंने अपनी पहली कार खरीदी और Pravasi Cabs Pvt.Ltd. नाम से एक कंपनी की शुरुआत की।

इस कार को एक साल चलाने के बाद उन्होंने एक और कार खरीदी और उसी समय एक कैब कंपनी की स्थिति खराब चल रही थी जिसके बारे में उन्हें पता चला कि यह कैप कंपनी अपनी खराब स्थिति के चलते अपने बिजनेस को बेचना चाहती है।

तब Renuka Aradhya ने करीब 6 लाख मे उस कंपनी को खरीद लिया। उस समय उस कंपनी के पास करीब 35 कैब थी। यहीं से उनके सफलता की कहानी शुरू होती है।

इनकी सफलता तब शुरू हुई जब अमेज़न इंडिया ने खुद को प्रमोशन के लिए इन्हें चुना। धीरे-धीरे वॉलमार्ट, जनरल मोटर जैसे बड़ी-बड़ी कंपनियां Renuka Aradhya के साथ काम करने लगी।

वक्त बीतने के साथ उनकी कंपनी का टर्नओवर 40 करोड़ के पार हो गया। आज वह इस कारोबार के जरिए डेढ़ सौ से भी ज्यादा लोगों को रोजगार दिये है।

रेणुका महिला सशक्तिकरण के मद्देनजर महिलाओं को ड्राइवर बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें खुद की कार खरीदने के लिए 50 हजार की मदद भी करते हैं।

Renuka Aradhya की सफलता की कहानी यह सीख देती है कि यदि कड़ी मेहनत के साथ कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किल को हराकर अपनी राह को आसान बनाया जा सकता है।

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