नवम्बर 27, 2022

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दस हजार की लागत से शुरू किया व्यवसाय, आज करोड़ो में हो रही कमाई

दस हजार की लागत से शुरू किया व्यवसाय, आज करोड़ो में हो रही कमाई

दस हजार की लागत से शुरू किया व्यवसाय, आज करोड़ो में हो रही कमाई

दस हजार की लागत से शुरू किया व्यवसाय, आज करोड़ो में हो रही कमाई, कई बड़े होटल बन गए हैं इनके ग्राहक ।

आज हम एक ऐसी महिला की कहानी लेकर आए हैं जो 6 महीने तक एक फार्मा कंपनी में नौकरी कर रही थी, लेकिन उन्होंने नौकरी इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वह किसी सीमा में रहकर अपनी क्षमता को बांधना नहीं चाहती थी।

हम बात कर रहे हैं मुंबई की पली-बढ़ी नीता अड़प्पा की। हालांकि नीता की आकांक्षाओं को पंख तब मिला है जब वह शादी के बाद बेंगलुरु चली गई। यहां पर उनकी मुलाकात ने कालेज के एक जूनियर अनिशा देसाई से होती है।

आज से 23 साल पहले एक जज्बे के साथ इन दोनों ने 10 हजार की लागत के साथ अपने गैरेज से एक कारोबार की शुरुआत करी थी। उनके सपने बड़े थे लेकिन मुश्किलें भी बहुत से थी।

लेकिन इन सारी मुश्किलों से बड़ा था उनका हौसला। शुरुआती दिनों में उन्होंने अपना उद्योग गैरेज से चलाया। लेकिन आज उनका उद्योग प्रकृति हर्बल देश के विभिन्न प्रतिष्ठित होटलों और हॉस्पिटल में 10,000 हर्बल किट की सप्लाई करता है।

आज इसके ऑनलाइन 5000 प्रोडक्ट सीधे ग्राहकों को बेचे जा रहे हैं। हर्बल प्रोडक्ट में शैंपू, कंडीशनर, हेयर मास्क, हेयर जेल, फेस मास्क जैसी चीजें आती हैं। यह सारी चीजें प्राकृतिक तत्वों से जैसे कि एलोवेरा, हल्दी, दालचीनी आदि का प्रयोग करके बनाई जाती हैं।

इस तरह हुई उद्योग की शुरुआत :-

मुंबई के एसएनडीसी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद नीता अड़प्पा 1992 में एक दवा कंपनी में काम करने लगी थी। हालांकि नौकरी के 6 महीने बाद ही उनकी सगाई हो गई और वह नौकरी से इस्तीफा दे देती हैं और शादी करके बेंगलुरु चली जाती हैं।

लेकिन नीता अड़प्पा हमेशा से अपना खुद का काम करना चाहती थी और उनके दिमाग में ब्यूटी प्रोडक्ट के क्षेत्र में कुछ करने का विचार था। जब नीता अड़प्पा की शादी हुई तब केमिकल युक्त किसी प्रोडक्ट के इफेक्ट के चलते हैं उनकी त्वचा पर बहुत सारे धब्बे उभरने लगे।

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इस बारे में नीता अड़प्पा बताती हैं कि जिस एलर्जी से वह डर रही थी वह उनके व्यवसाय का और पारिवारिक जीवन के लिए बहुत ही भाग्यशाली सिद्ध हुआ है।

बेंगलुरु जाने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी जूनियर अनिशा देसाई भी बेंगलुरु में रहती है तब उन्होंने एक दूसरे से संपर्क किया और यहीं से व्यवसाय की शुरुआत हुई।

शुरू में वह शैंपू, एलोवेरा जेल, मॉइस्चराइजर के सैंपल बनाने के लिए काम की और 2 साल बाद 1994 में दोनों ने औपचारिक रूप से अपने कंपनी को लांच किया।

इस काम की शुरुआत में उन्हें कई सारी बड़ी परेशानियां होती हैं जैसे कि शुरू में नीता और अनीशा के पास ग्राहक नही थे न ही उन्हें मार्केटिंग के बारे में कोई जानकारी थी। तब सबसे पहले उन्होंने अपने प्रोडक्ट को नजदीकी दोस्तों और परिजनों के बीच वितरित करना शुरू किया।

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बड़े ग्राहकों के इंतजार के बजाय वह पार्लर में जाकर अपने प्रोडक्ट की सैंपल देना शुरू किया। इससे उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और इसी के जरिए उन्हें अपना पहला बड़ा ऑर्डर भी मिला था।

इन्हें अपना पहला आर्डर बेंगलुरु के नाहर हेरिटेज होटल से मिला था, उस समय इस होटल को शैंपू और मॉइश्चराइजर की आवश्यकता थी। इन्होंने समय से डिलीवरी दी और प्रोडक्ट की गुणवत्ता को देखते हुए होटल ने अपने सारे आवश्यकताओं का आर्डर इन्हें दे दिया, जो कि उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि रही।

इस तरह से आज उनकी कंपनी द्वारा 18 तरह के प्रोडक्ट किट बनाये जाते है जिसमें शॉवर प्रोडक्ट से लेकर जेल आदि भी बनाए जाते हैं। आज यह किट बड़े-बड़े अस्पतालों और होटलों में भी भेजे जा रहे हैं।

इस बारे में नीता अड़प्पा कहती है कि अगर वास्तविक रूप से देखा जाए तो होटल इंडस्ट्री में जुबानी तारीफ ही उनकी मार्केटिंग का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गया। आज उन्हें 70% आर्डर इसी लो प्रोफाइल मार्केटिंग की वजह से मिल रहा है।

नीता अड़प्पा अपने नेटवर्क और ग्राहकों को बेहतर सेवा देकर उन्हें अपना ग्राहक बना ली और अपने काम के जरिए ही अपनी पहचान बना ली हैं। लेकिन उनके लिए यह सफर आसान नहीं था। कुछ सालों बाद अनीशा को बेंगलुरु छोड़ना पड़ गया था, तब नीता अकेले ही काम कर रही थी।

उन्होंने थोक बिक्री, पैकेजिंग जैसे कई समस्याओं से जूझना पड़ा लेकिन कड़ी मेहनत के नतीजे सकारात्मक मिले।

शुरू में परेशानियां हुई लेकिन धीरे-धीरे संतुलन बन गया और उन्होंने बच्चों को पालते हुए अपने प्रोडक्ट की डिलीवरी जारी रखी।

आज देश भर के प्रतिष्ठित होटल जैसे कि रॉयल आर्किड, होटल द गोल्डमैन, स्पा, पार्क होटल, मणिपाल होटल आदि होटलों से उन्हें आर्डर मिल रहे हैं। अपनी सफलता के बाद उन्होंने रिटेल मार्केटिंग में आने का विचार बनाया।

वह बताती हैं कि उनके प्रोडक्ट को खरीदने के लिए होटल में रुके एक महिला ने उन्हें कॉल किया और उन्हें रिटेल मार्केटिंग में आने के लिए प्रेरित किया और नीता बताती है उस महिला ने हमारे शैंपू का प्रयोग किया और पाया कि उसके बालों की समस्या कुछ ही समय में बहुत कम हो गई।

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उसने उस शैंपू के लेबल को देखा और कॉल किया और 500 लीटर शैंपू की बोतल आर्डर की। लेकिन उन दिनों वह रिटेल प्रोडक्ट नही बेंच रही थी। लेकिन उस कॉल के बाद उन्होंने फैसला कर लिया कि वह रिटेल मार्केटिंग में भी काम करेंगी।

इसके बाद नीता अड़प्पा व्यवसाय संबंधी सेमिनार, वर्कशॉप और मीटिंग में भाग लेने लगी। इससे उनकी कंपनी को बहुत फायदा हुआ उनका आत्मविश्वास बढ़ा और मुनाफा भी बढ़ने लगा।

सोशल मीडिया बना मददगार :-

नीता अड़प्पा रिटेल मार्केटिंग में आने से पहले ग्राहक की जरूरतों को समझने और ग्राहकों के बीच जगह बनाने के लिए पहले एक फेसबुक पेज बनाया और ब्लॉग भी साथ में लिखने लगी। लेकिन लोगों के पास ब्लॉग को पढ़ने के लिए समय नही रहता था।

तब उन्होंने अपने प्रोडक्ट के लेवल पर दिए गए दिशा निर्देशों के अनुसार उनका प्रयोग किया और कंपनी ने फेस और हेयर मास्क और स्क्रब बनाया साथ ही इनबॉक्स द्वारा लोगों को वह मुफ्त में सलाह दे दिया करती थी।

इसी बीच नीता अड़प्पा की 25 वर्षीय बेटी अनुषा ने यूके के मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करके अब इस कंपनी से जुड़ गई है। अब मां बेटी की यह जोड़ी वेबसाइट बनाने के अलावा प्रोडक्ट को डिजाइन करने का भी काम कर रही हैं और उन बिंदुओं पर भी काम कर रही हैं जिससे उनके प्रोडक्ट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में एक पहचान मिल सके।

उन्होंने अपने प्रोडक्ट की पैकेजिंग में भी बदलाव कर दिया है और बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग पर ध्यान दे रही हैं वह इको फ्रेंडली पैकेजिंग बनाने के लिए रीसायकल होने वाले कागज, कॉफी, भूसा, जूट आदि को प्रयोग कर रही है।

सफलता के विषय मे नीता अड़प्पा कहती है कि मुसीबतों का सामना धैर्य के साथ करना चाहिए। खुद पर भरोसा अगर रखेंगे तभी दुनिया आप पर भरोसा कर पाएगी। अपनी योजनाओं में बार-बार बदलाव लाने की जरूरत नहीं है। किसी भी उद्योग में आने के लिए थोड़ा जोखिम तो उठाना ही पड़ता है। लेकिन अगर ग्राहकों की जरूरतों का ध्यान रखा जाता है, तब सफलता मिलेगी बस धैर्य के साथ निरंतर काम करना पड़ता है।