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Tuesday, January 19, 2021

इस महिला ने 30 लाख के कर्ज को चुकाया और अंगूर की खेती से अब 40 लाख रुपए हर साल कमाती है

आज की हमारी कहानी एक महिला किसान की है, जिसने अपनी जिंदगी में बहुत सारी चुनौतियों का सामना किया और आज लोगों के लिए एक मिसाल है।

सही ही कहा गया है कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी सफलता हासिल कर सकता है। इस महिला ने भी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर खेती के गुर सीखे और आज एक सफल किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है।

लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उनके ऊपर 30 लाख का कर्ज था लेकिन आज वह कर्ज से मुक्त हो गई हैं और सालाना अंगूर की खेती करके 40 लाख रुपए हर साल कम आ रही है।

जी हां हम बात कर रहे हैं नासिक में रहने वाली निफाड तालुका की 46 वर्षीय संगीता बोरासते की, जो अंगूर की खेती करते हैं। यह पूरा क्षेत्र अंगूर की खेती के लिए प्रसिद्ध है।

संगीता बोरासते अपनी अंगूर की उपज का लगभग आधा हिस्सा विदेशों में एक्सपोर्ट भी करती हैं और भारत में भी उन्हें अपनी फसल की अच्छी कीमत मिल जाती है।

लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए संगीता बोरासते ने बहुत संघर्ष किया और कई सारी चुनौतियों का डटकर सामना किया है।

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Sangeeta Borasate बताती है कि उनकी शादी 1990 में हुई थी। जब उनकी शादी हुई थी तो वह महज 15 साल की थी। उनके पति अरुण बैंक में काम करते थे।

इसी बीच में घरेलू विवाद की वजह से बटवारा हो गया और उनके हिस्से में 10 एकड़ की जमीन आई। अरुण खेती करना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपनी बैंक की नौकरी छोड़ कर खेती करना शुरू कर दिया।

लेकिन उन्हें खेती के बारे में जानकारी नहीं थी इसलिए उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। नुकसान की वजह से उनके ऊपर कर्ज हो गया और इसी के चलते ढाई एकड़ जमीन उन्होंने बेच दी।

Sangeeta Borasate और उनके पति ने खेती में खूब संघर्ष किया और साल 2014 में उनके खेतों में अच्छी फसल होनी शुरू हो गई तो संगीत को लगा की अब जल्दी कर्ज मुक्त हो सकते हैं।

लेकिन होनी को कौन टाल सकता है किस्मत में क्या लिखा है इसे कोई नहीं जानता! संगीता के साथ एक और बड़ी दुर्घटना हो गई उनके पति का देहांत हो गया।

अब संगीता बोरासते के ऊपर अपनी तीन बेटियों और एक बेटे की जिम्मेदारी थी, साथ ही पति द्वारा लिए गए 30 लाख रुपए के कर्ज को भी चुकता करना था।

उन दिनों संगीता सिर्फ इतना जानती थी कि मजदूरों द्वारा खेत में काम करवाना है, लेकिन खेत में क्या करना है क्या नहीं यह सब की उन्हें कोई भी जानकारी नही थी।

अपने संघर्ष के दिन को याद करते हुए संगीता ने बताया कि एक बार दीपावली की रात थी वह 9 बजे रात तक खेत में ही काम कर रही थी। उनके खेत में ट्रैक्टर फस गया था और वह ट्रैक्टर को निकलवाने में जुटी थी। दूसरी तरफ लोग दिवाली मना रहे थे।

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वह शुरुआत में आपने कुछ रिश्तेदारों पर भी निर्भर थी, जिनसे वह खेती के बारे में जानकारी हासिल करती थी। लेकिन वक्त के साथ उन्होंने सब कुछ खुद संभाल लिया। संगीता और उनके परिवार में काफी परिस्थितियों का सामना किया।

संगीता बोरासते बताती है कि अंगूर के पेड़ मौसम के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होने की वजह से उन्हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। कई बार वह रात रात भर जग कर बान फायर करती थी जिससे अपने अंगूर के खेत के बागान को गर्म बनाये रखती थी।

कहा जाता है कि किस्मत भी तभी साथ देती है जब आप मेहनत करते हैं। Sangeeta Borasate बहोत मेहनत की और किस्मत उन्हें उसका अच्छा फल दे रही थी।

उन्होंने अपने Grapes की गुणवत्ता बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दिया जिससे उन्हें विदेशों में एक्सपोर्ट करने में किसी भी प्रकार की मुश्किलें न आये। यही वजह है कि अब हर साल उनकी आधी से ज्यादा फसल बाहर एक्सपोर्ट हो जाती है।

अब उन्होंने अपना सारा कर्ज भी चुका दिया है और सालाना लगभग 40 लाख तक की कमाई हो जाती है। जिसमें 15 लाख सालाना उनका प्रॉफिट होता है, बाकी खेती के रखरखाव में लग जाता है।

संगीता ने अपनी दो बेटियों की शादी कर दी है और जल्द ही वह तीसरी बेटी की शादी करने वाली है। संगीता बताती है कि जिंदगी से उन्होंने एक ही बात सीखी है कि कभी भी हौसला मत छोड़ो।

Sangeeta Borasate बताती है कि उन्हें सिर्फ इतना पता था कि उन्हें सफल होना ही है। उन्होंने कड़ी मेहनत की और हर चुनौतियों का सामना किया।

लॉक डाउन के दौरान भी उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया। इस दौरान उनकी फसल बाहर एक्सपोर्ट नही हो पाई और उन्हें लगभग 25 लाख का नुकसान झेलना पड़ा।

लेकिन उन्होंने हार नही मानी और अब वह Grape processing करके उसे किशमिश बनाकर बेचने का काम कर रही हैं।

संगीता बोरासते की कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि यदि हम अपनी मेहनत करते हैं तो किस्मत हमारा साथ जरूर देती है। इसके अलावा कभी भी परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं टेकने चाहिए। हमें परिस्थितियों का सामना हौसले के साथ डंट कर करना चाहिए तभी हम हर चुनौती हर बाधा से पार पा सकते हैं।

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