नवम्बर 27, 2022

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संजू वर्मा पीसीएस अधिकारी

संजू वर्मा पीसीएस अधिकारी

7 साल पहले पढ़ने के लिए घर से भागी यह लड़की आज बन गई है पीसीएस अधिकारी आइए जानते हैं इनकी दिलचस्प कहानी

भारत में आज भी कई राज्य में लड़कियों को उच्च शिक्षा हासिल करने और कैरियर के लिए अपने सपनों का पीछा करने की इजाजत नहीं होती है।

उनके परिवार उन पर दबाव बनाते हैं कि वह जल्द से जल्द विवाह कर ले और मजबूरी में कई सारी लड़कियां इस बंधन में बंध जाती हैं। भारत के कई राज्यों में यह एक सामान्य घटना है।

लेकिन बहुत कम ही लोग होते हैं जो पारंपरिक बेडियों को धता बता पाते हैं और अपने मेहनत के दम पर सफलता हासिल करते हैं।

आज हमें कैसी लड़की की कहानी बता रहे हैं जिसने पढ़ाई के लिए 7 साल पहले 2013 में अपने घर को छोड़ दिया था यानी कि घर से भाग गई थी और आज वह लड़की एक पीसीएस अधिकारी बन गई है। हम बात कर रहे हैं मेरठ की रहने वाली संजू वर्मा की, जिनके ऊपर कैरियर से पहले शादी का दबाव बनाया जा रहा था।

तब उन्होंने कैरियर के विकल्प को चुना था। साल 2013 में 28 वर्षीय संजू वर्मा अपनी मां के निधन के बाद घर से भागने का फैसला करती हैं।

यह वह वक्त था जब वह दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर की पढ़ाई कर रही थी, लेकिन उनके परिवार वाले उन पर शादी का दबाव बना रहे थे, लेकिन संजू अपने सपनों को पूरा करना चाहती थी।

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इस लिए उन्होंने कई बार अपने परिवार वालों को शिक्षा और कैरियर को महत्व को भी समझाने की कोशिश की लेकिन परिवार वाले नही माने तो जब कोई भी विकल्प उन्हे नहीं दिखा तब संजू ने घर से भागने का फैसला किया।

संजू बताती हैं कि साल 2013 में उन्होंने घर छोड़ दिया और पीजी कोर्स करने लगी। उन दिनों वह दिल्ली विश्वविद्यालय से पीजी कर रही थी।

उनके पास पैसे नही थे, वह किराए का एक कमरा ले कर रह रही थी। वह पैसों के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर देती है।

इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों में वह पार्ट टाइम टीचिंग की जॉब भी करती हैं। किसी तरह वह अपना खुद का खर्चा चलाती रही और सिविल सेवा की पढ़ाई करती रही।

पीसीएस 2018 का रिजल्ट आया तब संजू वर्मा उसने पास हो गई। हालांकि संजू वर्मा बहुत महत्वकांक्षी हैं। वह सिविल सेवा परीक्षा पास करना चाहती है और डिविजनल मजिस्ट्रेट बनने का सपना देखती हैं।

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आज संजू वर्मा 35 साल की है और अपने परिवार का आर्थिक रूप से समर्थन करना चाहती हैं। वह उम्मीद करती हैं कि उनके परिवार वाले उनकी पसंद का सम्मान करेंगे क्योंकि आज वह एक सरकारी अधिकारी बन चुकी हैं।

संजू वर्मा की कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अगर हमारे अंदर अपने सपनों को पूरा करने का दृढ़ साहस है तब हम उसे हासिल कर ही लेते हैं।

लाख कोशिशें की जाएं रास्ते में बाधा उत्पन्न करने की लेकिन जिन लोगों को अपने सपने पूरे करने होते हैं वह हर हाल में अपने लिए रास्ता ढूढ ही लेते हैं और लोगों के लिए एक मिसाल कायम करते हैं।