नवम्बर 29, 2022

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IAS बनने के लिए 6 महीने खुद को कमरे में बंद करने वाली निधि की सफलता की कहानी

IAS बनने के लिए 6 महीने खुद को कमरे में बंद करने वाली निधि की सफलता की कहानी

IAS बनने के लिए 6 महीने खुद को कमरे में बंद करने वाली निधि की सफलता की कहानी

UPSC Success Story:

आज हम जानेंगे यूपीएससी 2019 की परीक्षा में 83 वीं रैंक हासिल करने वाली निधि सिवाच के बारे में। जो आईएस बनाने के लिए खुद को कमरे में बंद कर ली थी।

कहते हैं कि रास्ते में चाहे जितनी परेशानी क्यों ना आ जाये उनसे हार नहीं माननी चाहिए। निधि ने कभी भी परेशानियों से हार नहीं मानी और अपने तीसरे प्रयास में अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया।

निधि ने यह सफलता बिना कोचिंग ज्वाइन करें हासिल की है। एक ऐसा भी समय आया था जब निधि ने डिस्ट्रक्शन से बचने के लिए खुद को कमरे में बंद कर लिया था।

परिचय

निधि हरियाणा के गुरुग्राम में जन्मी है और अपने माता-पिता की पहली औलाद है। इंटरमीडिएट के बाद निधि ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

इसके बाद 2 साल तक हैदराबाद की एक कंपनी में जॉब किया। जॉब के दौरान ही निधि को इस बात का अहसास हुआ कि उनकी मंजिल यह नहीं बल्कि कुछ और है।

तब उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने का मन बनाया और यूपीएससी की तैयारी में जुट गई। उन्हें तीसरे प्रयास में आईएएस का पद मिला और उनका सपना पूरा हुआ।

डिफेंस को छोड़कर सिविल सर्विसेज को चुना –

निधि ने 2 साल हैदराबाद की एक कंपनी में काम किया है। इसके पहले निधि में पहले  कभी उसके पहले यह नहीं सोचा था कि वह सिविल सर्विसेज में जाना चाहती हैं। वह देश की सेवा करना चाहती थी। इसलिए वहां पहले एएफसीएटी (AFCAT) परीक्षा में बैठी और उन्हें सफलता भी मिली।

लेकिन लिखित परीक्षा में सफलता के बाद वह इंटरव्यू में नहीं गई और उसकी जगह उन्होंने सिविल सर्विस की तैयारी के बारे में सोचना शुरू किया। इसके बाद वह यूपीएससी (UPSC) करने के लिए तैयारी में जुड़ जाती हैं।

घरवालों ने शादी का दबाव डाला –

निधि का नौकरी में मन नहीं लग रहा था। दूसरी तरफ उनका परिवार उनके ऊपर शादी करने का प्रेशर बना रहा था। निधि के जिंदगी में कई सारे पड़ाव आए। निधि अपने जिंदगी के इस पड़ाव पर शादी नहीं करना चाहती थी।

बल्कि अपनी जिंदगी का मकसद ढूंढना चाहती थी। उन्होंने यूपीएससी को अपना मकसद बनाया। यूपीएससी परीक्षा में उन्हें दो बार असफलता का सामना करना पड़ा।

जब निधि तीसरा प्रयास देने वाली थी तब उनके घर वालों ने उनके सामने एक शर्त रखी। घरवालों ने शर्त रखी  कि अगर उन्हें इस  तीसरे प्रयास में सफलता नहीं मिलती है तब उन्हें शादी करनी ही पड़ेगी।

निधि अपने घरवालों की शर्त मान लेती हैं और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर देती हैं। तीसरे प्रयास में किस्मत ने भी उनका साथ दिया और उन्होंने भरपूर मेहनत भी की। तीसरे प्रयास में उनका आईएएस बनने का सपना पूरा हो गया।

6 महीने खुद को एक कमरे में बंद रखा –

निधि ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि जब वह यूपीएससी की तैयारी कर रही थी तब वह खुद को 6 महीने के लिए कमरे में बंद कर ली थी। क्योंकि घर पर रहकर पढ़ाई करना आसान नहीं होता है।

वह खुद को डिस्ट्रेक्शन से बचाना चाहती थी। इसलिए उन्होंने यह तरीका अपनाया और खुद को पढ़ाई में पूरी तरीके से झोंक दिया। बिना किसी कोचिंग की मदद से व बिना किसी सोशल ग्रुप का हिस्सा बने अपनी मेहनत के दम पर निधि ने इस परीक्षा को पास करके दिखाया। उन्हें उनके तीसरे प्रयास में 83 वीं रैंक हासिल हुई।

दूसरे अभ्यार्थियों को सलाह –

यूपीएससी की तैयारी करने वाले वाले कैंडिडेट को निधि यह सलाह देती हैं कि उन्हें लगातार मेहनत करनी चाहिए। निधि कहती हैं कि एक बार यदि कोई अभ्यार्थी लक्ष्य निर्धारित कर लेता है यह उसे यूपीएससी परीक्षा पास करनी है तो छोटी-छोटी गलतियां कई बार राह में रोड़ा बन सकती है।

छोटी-छोटी गलतियों को सुधारने के लिए पूरी ईमानदारी से मेहनत करनी चाहिए और उन्हें सुधार के परीक्षा में बैठना चाहिए तो सफलता अवश्य मिलेगी।

निधि यह भी कहती हैं कि यूपीएससी परीक्षा के दौरान कई बार सफलता मिल सकती है। लेकिन इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। बल्कि इनसे सीख लेना चाहिए और उन गलतियों को सुधार कर आगे बढ़ना चाहिए।

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