नवम्बर 28, 2022

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Success story of Serum Institute

अदर पूनावाला की घोड़ो के व्यापार से 5 लाख के साथ शुरू हुई सीरम इंस्टिट्यूट की सफलता की कहानी

Success story of Serum Institute :-

सन 2019 के आखिरी में जब चीन से कोरोना वायरस महामारी फैलने की खबर आई थी तो लगभग पूरी दुनिया डर गई थी। 2020 की शुरुआत में ही इस महामारी ने ऐसा रूप दिखाया की पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ गई।

इस वायरस से बचने के लिए दुनिया के अधिकांश देशों ने अपने यहाँ लॉकडाउन भी लगाया। लेकिन कोरोना वायरस को प्रसार को रोकने में यह काफी नही रहा।

वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया। भारत देश वैक्सीन बनाने की दौड़ में शामिल हो गया। भारत के पुणे में स्थित सिरम इंस्टीट्यूट के सीईओ आदर पूनावाला की देखरेख में कोविड-19 नाम की वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया गया।

आज सिरम इंस्टीट्यूट कोविशिल्ड वैक्सीन का भारत के अलावा दुनिया के दूसरे देशों में वैक्सीन का बड़ा आपूर्तिकर्ता है। आज हम जानेंगे आदर पूनावाला के इस मुकाम तक पहुंचने के सफर के बारे में

आदर पूनावाला ऑक्सफोर्ड एस्ट्रोजैनिका के साथ समझौता –

आदर पूनावाला की कंपनी सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड एस्ट्रोजेनिका के साथ मिलकर कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए समझौता किया।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है। इसमें सिरम इंस्टीट्यूट का भी काफी ज्यादा योगदान है। इन दिनों आदर पूनावाला अपने पिता साइरस और परिवार के साथ लंदन में हैं।

अफवाहों का बाजार गर्म है। लोग उन्हें धमकियां दे रहे हैं जिसके चलते वह देश से बाहर गए हैं। लेकिन आदर पूनावाला ने ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है।

19 वी शताब्दी में पुणे आये –

कहा जाता है कि ब्रिटिश शासन के दौरान 19 वी शताब्दी में पूनावाला परिवार पुणे आया था। इस दौरान कई पारसी परिवार भारत में आकर बस रहे थे और प्रशासन से लेकर कारोबार तक में खुद को स्थापित कर रहे थे।

कहा जाता है कि जिन शहरों में यह परिवार बसे उन शहरों का नाम इन लोगों के नाम के आगे देखने को मिलता है जैसे आदर के परिवार का नाम पूनावाला।

घोड़ों का व्यापार

स्वतंत्रता से पहले पूनावाला परिवार कंस्ट्रक्शन का कारोबार करता था। लेकिन उनको प्रसिद्धि घोड़ा के कारोबार के रूप में मिली। आदर पूनावाला के दादा सोनी पूनावाला घोड़ों का कारोबार करते थे और अच्छे किस्म के घोड़े को रेस के लिए तैयार करते थे।

घोड़ों के व्यापार के चलते हैं पूनावाला परिवार बड़े-बड़े उद्योगपतियों से जुड़ गया। आदर के पिता साइरस भी करोड़ों का कारोबार बढ़ाने की सोच रहे थे।

लेकिन उस वक्त उनका ध्यान वैक्सीन उत्पादन की तरह हो गया और उन्होंने जोखिम उठा लिया क्योंकि उस वक्त भविष्य की कोई भी गारंटी नहीं थी। भारत सीमित स्तर पर वैक्सीन उत्पादित करता था जिसमें सरकार का रोल महत्वपूर्ण था।

ऐसे शुरू किया वैक्सीन कंपनी बनाना –

साइरस पूनावाला को वैक्सीन कंपनी बनाने का आईडिया उस वक्त आया जब वह मुंबई में हापकिन इंस्टिट्यूट को पूनावाला फाइनेंस को घोड़े देते थे। यह वह घोड़े होते थे जो बूढ़े हो जाते थे और इन घोड़ों का इस्तेमाल चेचक और टिटनेस का टीका बनाने के लिए हो रहा था।

तब साइरस ने सोचा कि क्यों न अपने ही घोड़ों का इस्तेमाल करके खुद ही इस क्षेत्र में काम किया जाए और उन्होंने 1966 में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की स्थापना की।

इस तरह साइरस बने अमीर –

सिरम इंस्टीट्यूट में कई सारी बीमारियों की वैक्सीन बनाना शुरू किया। 1971 में इस कंपनी ने खसरा और कंठमाला रोग के लिए टीका बनाया। जल्द ही इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम जब शुरू किया गया तो इसे एक अवसर देखा और अपने उत्पादन को बढ़ाकर यूरोप और अमेरिका से तकनीक लाकर वैक्सीन बनाना शुरू किया और उत्पादों की कीमत बेहद सस्ती रखी।

5 लाख से साइरस ने सिरम इंस्टीट्यूट की शुरुआत की थी। अब वह दुनिया मे सबसे अमीर आदमी की लिस्ट में 165 स्थान पर और भारत के छठे सबसे अमीर शख्स हैं।

2011 में आदर पूनावाला ने सीईओ का पद सम्हाला –

अदर पूनावाला इंग्लैंड से अपनी पढ़ाई पूरी किए हैं और साल 2001 में  सिरम इंस्टीट्यूट से जुड़े। शुरुआत सेल विभाग में काम करते थे। साल 2011 में उन्हें सीरम समूह के सीईओ बनाया गया और उस वक्त उन पर उनके पिता का प्रभाव देखने को मिल रहा था।

लेकिन SEO बनने के बाद आदर पूनावाला लगातार कंपनी को आगे बढ़ाते रहें और कंपनी का विस्तार किया 2012 में एक वैक्सीन कंपनी का उन्होंने अधिग्रहण किया।

इसी के बाद सिरम इंस्टीट्यूट दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन उत्पादन करने वाली कंपनी बन गई। 2011 में सिरम इंस्टीट्यूट 35 देशों में वैक्सीन की आपूर्ति करती थी लेकिन मौजूदा समय में यह 165 देशों को वैक्सीन सप्लाई कर रही है।

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