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Friday, February 26, 2021

आईआईटी कानपुर के छात्र द्वारा बनाया गया यह स्मार्ट पौधा मात्र 20 मिनट के अंदर कमरे की हवा को कर सकता है साफ

आजकल के दौर में बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते यह एक जानलेवा समस्या बन गया है। हम सब अच्छी तरीके से जानते हैं कि बहुत सारे लोग इनडोर प्लांट इसलिए रखते हैं ताकि आसपास की हवा को शुद्ध बनाया जा सके।

ऐसे ही एक प्लांट है स्नैक प्लांट जो कि एयर प्यूरीफायर के तौर पर जाना जाता है। खासकर के बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण की वजह से यह आज मानव जीवन के लिए अनिवार्य प्राकृतिक संसाधन जैसे बन गया है क्योंकि बढ़ते शहरीकरण की वजह से अनिवार्य प्राकृतिक संसाधन भोजन, पानी, हवा दूषित हो गई है।

पानी और भोजन को शुद्ध करने के लिए हमारे पास वाटर फिल्टर और गार्डनिंग जैसे कई विकल्प आज मौजूद है। लेकिन हवा को शुद्ध करने के लिए आज भी हमारे पास आसान विकल्प जल्दी नही दिखता है।

लेकिन हम अगर एयर फिल्टर के प्रचलन की बात करें तो यह उपलब्ध भले ही हो गया है लेकिन यह आसान नही है क्योंकि बाजार में उपलब्ध ज्यादातर एयर फिल्टर काफी महंगे हैं।

ऐसे में घरों के लिए एयर फिल्टर के नाम पर ज्यादा से ज्यादा इनडोर प्लांट लगाना ही काफी फायदेमंद है। लेकिन ये पौधे कुछ एरिया को ही कवर कर पाते है। यदि पूरे कमरे को शुद्ध करना हो तो हमें कम से कम 10 से 12 पौधे लगाने की जरूरत होती है।

आज हम एक ऐसी तकनीक के बारे में जानेंगे जिसमें छोटा सा पौधा ही पूरे घर की हवा को फिल्टर करने का काम कर सकता है। यह इनोवेशन आईआईटी कानपुर के छात्र संजय मौर्य के द्वारा किया गया है।

जिन्होंने स्मार्ट बायोफिल्टर फ्लावर प्लांट बनाया है, जिसको उन्होंने U Breath नाम दिया है। यह हमारे आसपास की हवा को फिल्टर करने की प्रक्रिया को कई गुना बढ़ाने का काम करता है।

इस स्टार्टअप के को फाउंडर आईआईटी कानपुर के छात्र संजय मौर्य बताते हैं कि हवा को शुद्ध करने वाला पौधा वातावरण से हवा को खींचता है और उनकी जड़ों में वह जाकर हवा शुद्ध होती है और जो ऑक्सीजन उत्पन्न होती है उसे ये पौधे बाहर निकालने का काम करते हैं।

यह प्रक्रिया धीमी होती है क्योंकि गमले में हवा की सप्लाई करने वाली जगह बेहद कम होती है। लेकिन इसे तकनीक के द्वारा हल किया जा सकता है।

आज से करीब 2 साल पहले जब दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा बढ़ गया तब हर किसी को वायु प्रदूषण के बारे में चिंता सताने लगी।

दिल्ली वासी उस दौरान मास्क पहनने के लिए मजबूर हो गए थे। इसी के चलते दिल्ली सरकार ने ऑड-इवन ट्रैफिक नियम भी शुरू किया था क्योंकि ज्यादातर प्रदूषण की वजह वाहनों से निकलने वाला धुआं, बढ़ती इंडस्ट्री और त्योहारों के दौरान जलाए जाने वाले पटाखों की वजह से निकलने वाली जहरीली गैस से ही रही हैं।

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आईआईटी कानपुर से मैकेनिक इंजीनियरिंग के छात्र रहे संजय मौर्य भी उस समय दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैकेल्टी आफ मैनेजमेंट स्टडीज से एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे।

तब उन्होंने इसका हल ढूंढने की कोशिश की, जिससे सामान्य घरों और दफ्तरों में शुद्ध हवा उपलब्ध कराई जा सके। इसके लिए उन्होंने अपने दोस्तों और सीनियर से बात की लेकिन उन्होंने रिसर्च में पाया कि आज भी हवा को शुद्ध करने के विकल्प बहुत सीमित हैं।

वे या तो प्रकृति है या फिर महंगे आर्टिफिशियल तरीको पर ही निर्भरता है। उन्होंने कुछ अलग सोच के साथ कई अलग-अलग लोगों से बातचीत करते हुए इस पर काम करना शुरू किया और आज वह Ubirth तक पहुंच गए।

यह एक बायो फिल्टर प्लांट है जो पौधे की हवा को शुद्ध करने की तकनीक से जुड़ा हुआ है जिस से कम समय में ज्यादा हवा को शुद्ध किया जाता है। इसमें तीन चीजें शामिल है पौधा, स्मार्ट गमला और सूक्ष्म जीव से भरपूर मिट्टी।

यह स्मार्ट गमला बिजली से चलता है और बायो फिल्ट्रेशन के जरिए हवा को शुद्ध करने का काम करता है। इसमें एक यू वी यूनिट लगी है जो स्वच्छ हवा को बाहर छोड़ता है। इसमें कोई एक्स्ट्रा फिल्टर नही लगा है।

यह बस हवा को फिल्टर करने की प्रक्रिया को तेज करने का काम करता है। इसमें एक फैन है जो गमले के अंदर सेक्शन प्रेशर बनाता है जिससे जड़ों में जो स्वच्छ हवा होती है वह इसे छोड़ता है। इसके अलावा जो मिट्टी में मौजूद एक्स्ट्रा सूक्ष्म जीव होते हैं वह प्रदूषक तत्वों को तोड़ने का काम करते हैं।

टेस्टिंग के दौरान इस डिवाइस से पाया गया कि हवा के एयर पॉल्यूशन लेवल मात्र 15 से 20 मिनट में 220 तक कम कर सकता है। इस तरह से इससे एयर क्वालिटी इंडेक्स में मात्र 20 मिनट में 285 से 30 तक आ गया।

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इसके लिए उन्होंने पांच घर में उगाए गए एयर प्यूरीफायर प्लांट के ऊपर इसका टेस्ट किया। यह सभी पौधे ज्यादातर गुरुग्राम के उनके घर के नर्सरी में उगाए गए थे।

ज्यादातर लोगों ने इसमें स्नेक प्लांट लगाने की सलाह दें क्योंकि इसकी देखभाल करना आसान होता है और यह हवा को शुद्ध करने का भी काम करता है।

यह लगभग 200 स्क्वायर फीट के कमरे की हवा को मात्र 15 से 20 मिनट में शुद्ध करने की क्षमता रखता है। इसे रेगुलर पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है क्योंकि इस गमले में एक इनबिल्ट वाटर यूनिट लगी है जिसमें लगभग 250 मिली लीटर पानी अपने आप ही आ जाता है।

जो लगभग एक महीने के लिए पर्याप्त होता है। लेकिन जब मिट्टी सूखने लगती है तो डिवाइस इसे ऑटोमेटिक रूप से पानी दे देती है।

आज इस डिवाइस की बाजार में कीमत ₹5000 है और उनकी टीम अभी सिर्फ दिल्ली के एनसीआर क्षेत्र में ही इसे बेच रही है। जल्द ही वह इसे अन्य क्षेत्रों में बेचने की योजना बना रहे हैं।

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