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5 महीने की तैयारी में गांव का लड़का पहले ही प्रयास में बना IAS

5 महीने की तैयारी में गांव का लड़का पहले ही प्रयास में बना IAS

5 महीने की तैयारी में गांव का लड़का पहले ही प्रयास में बना IAS

यूनियन पब्लिक कमिशन सर्विस (यूपीएससी) द्वारा हर साल सीएसई (सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन) की परीक्षा आयोजित की जाती है। इसे भारत की कठिनतम परीक्षाओं में से एक माना जाता है।

ऐसा समझा जाता है कि इस परीक्षा को पास करने के लिए 2 से 3 साल का समय लग जाता है। इसलिए यूपीएससी ने भी इसके प्रयासों की सीमा 4 से 10 तक रखी है।

लेकिन आज हम एक ऐसे कैंडिडेट की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने मात्र 5 महीने की तैयारी में पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को पास कर लिया और 62 वीं रैंक हासिल की।

जी हां हम बात कर रहे हैं अवध सिंघल की, जिन्होंने 2009 के यूपीएससी परीक्षा पास कर ली है और उन्हें ऑल इंडिया रैंक 62वीं मिला है।

जब मीडिया द्वारा उनसे पूछा गया तब उन्होंने बताया कि उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी मात्र 5 महीने में ही पूरी की थी। आइए जानते हैं किस तरह से उन्होंने इतने कम समय में इस कठिन परीक्षा को पास किया –

अवध सिंहल मूल रूप से पंजाब के फाजिल्का जिले के रहने वाले हैं और उनके प्रारंभिक शिक्षा दिक्षा भी यही पर हुई थी। उसके बाद 12वीं करने के बाद वह आईआईटी दिल्ली से अपना ग्रेजुएशन इलेक्ट्रिकल पावर इंजीनियरिंग में किया हुआ है।

इसके बाद बतौर मैनेजमेंट कंसलटेंट वह एक कंपनी में जॉब भी किया करते थे क्योंकि उन्हें जॉब की जरूरत थी। जैसे ही उन्हें जॉब ऑफर हुई उन्होंने इसे ज्वाइन कर लिया। अवध सिंहल बताते हैं कि उन्हें यूपीएससी में जाने का आईडिया जॉब करने के दौरान मिला।

यही से उन्हें प्रेरणा मिली कि उन्हें सिविल सेवा में जाना चाहिए क्योंकि यहां पर आकर वह प्राइवेट और पब्लिक दोनों ही सेक्टर के काम देख रहे थे और आए दिन आईएएस अफसरों से मुलाकात किया करते थे। वह उनके कामों से वे प्रभावित होते थे और इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि वह भी सिविल सेवा परीक्षा देंगे।

फिर 2018 में उन्हें जॉब करते-करते ऐसे ही एक साल निकल गया। तब वह अपनी कंपनी से कुछ महीने की छुट्टी लेकर यूपीएससी की तैयारी करने लगे।

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अवध सिंहल ने दिसंबर 2018 से अपनी तैयारी शुरू की। यह परीक्षा अपने आप में एक समय मांगती है। लेकिन उनके पास समय कम था और उन्हीने कम समय में ही तैयारी की। इसके पीछे कोई चमत्कार नहीं है बल्कि एक सही रणनीति के बदौलत उन्होंने इस परीक्षा को पास किया।

अवध सिंहल ने इस परीक्षा को पास करने के लिए एक टाइम टेबल और स्ट्रेटजी बनाई और पूरे नियम के साथ उसे फॉलो किया। अपने स्ट्रेटजी के बारे में वह बताते हैं कि यदि आप इस परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं तब इसमें भटकाव सही नही है।

किताबे नोट्स कोचिंग सेंटर के लिए ज्यादा दिनों तक भटकते रहना टाइम खराब ही करता है। इससे जो कांसेप्ट समझे भी हैं उसमें भी भ्रमित होने लगते हैं।

इसलिए वह कहते हैं कि सबसे पहले एक अच्छा मार्गदर्शक चुनो और उन्हीं के सानिध्य में रहो। वे अपनी सफलता के लिए अपने स्ट्रेटजी को सफलता की वजह मानते हैं। वह कहते हैं कि उनकी रिवीजन के स्ट्रेटजी की बदौलत ही वह इस परीक्षा को पास कर पाए हैं।

वह कहते हैं जब वह पढ़ते थे तब साथ में नोट्स भी बनाते थे और एक विषय की पूरी समरी बना लिया करते थे, जो कि बाद में उनके बहुत कमा आई।

वह जिस कोचिंग सेंटर में तैयारी करते थे वहां पर उन्होंने परीक्षा के लिए पूरा सिलेबस कवर कर लिया और इसके लिए उन्होंने 12 मॉक टेस्ट भी दिए जिससे उन्हें अपनी कमियों और खूबियों के बारे में पता चल गया।

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जब प्रीलिम्स की तैयारी कर रहे थे तब वह किसी भी विषय या कांसेप्ट को रटने के बजाय उसे समझने पर ज्यादा ध्यान देते थे। वह हर प्रश्न को व्याख्यात्मक रूप में लिखने का प्रयास करते थे।

इससे नई चीजें आसानी से समझ में आ जाती थी और हर छोटी चीज को परीक्षा के दौरान याद रखने में मदद भी मिली।

वह बताते हैं पहले सिलेबस को समझना चाहिए कि उसे क्या पढ़ना है और क्या छोड़ना है। अवध सिंहल का कहना है कि इस डिजिटल एजुकेशन की दुनिया में इसका अच्छा प्रभाव भी है और बुरा प्रभाव भी।

इसलिए पहले डिसाइड कर ली क्या पढ़ना है और कहां से पढ़ना है और क्या नही पढ़ना है। सबसे पहले यह समझ बनाये की क्या पढ़ना है क्योंकि नही तो ये सारी चीजें ज्यादा भटका नहीं पैदा करेंगे और लक्ष्य पर केंद्रित रहने में मदद मिलेगी और सफलता मिलेगी।