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गरीबी को मात देकर आज 60 करोड़ का कारोबार खड़ा करने वाले व्यक्ति की कहानी

गरीबी को मात देकर आज 60 करोड़ का कारोबार खड़ा करने वाले व्यक्ति की कहानी

गरीबी को मात देकर आज 60 करोड़ का कारोबार खड़ा करने वाले व्यक्ति की कहानी

कहते हैं कि जज्बा हो तो दुनिया का कठिन से कठिन काम को भी किया जा सकता है और सफलता हासिल की जा सकती है, बस जरूरत होती है दृढ़ संकल्प की।

अगर कोई व्यक्ति दृढ़ संकल्पित होकर अपने लक्ष्य का पीछा करता है तब वह कामयाब जरूर होता है। आज की हमारी कहानी एक ऐसे जीवंत नायक की कहानी है जो गरीबी को मात देकर आज 60 करोड़ का कारोबार खड़ा कर लिया है।

जी हां हम बात कर रहे हैं राजा नायक की, जिन्होंने आभाव और गरीबी भरी जिंदगी जी है। लेकिन आज 56 वर्षीय राजा एक ऐसे सफल उद्यमी के रूप में जाने जाते हैं जिन्होंने अपने दम पर बिजनेस की शुरुआत शून्य से कर के शिखर तक पहुचे है।

आज इतना बड़ा बिजनेस स्थापित कर लिया है जिससे उन्हें सालाना 60 करोड का टर्नओवर आता है।राजा नायक अपने बिजनेस के अलावा इस समय कर्नाटक के कॉमर्स और उद्योग में दलित इंडियन चैंबर्स के प्रेसिडेंट की भूमिका भी निभा रहे हैं।

बता दें कि राजा एक वक्त बेहद दयनीय आर्थिक हालातों से गुजर रहे थे। लेकिन उन्होंने गरीबी से हार नहीं मानी और संघर्ष करते रहे और आज अपनी सफलता की कहानी उन्होंने खुद लिखी है।

राजा का जन्म और पालन-पोषण एक बेहद गरीब दलित परिवार में हुआ था। उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, जिसकी वजह से उन्हें बचपन में स्कूल छोड़ना पड़ गया था।

पैसे की कमी की वजह से राजा के माता पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे थे। राजा चार भाई बहन थे और सभी को पढ़ा पाना उनके माता-पिता के लिए बहुत मुश्किल हो रहा था।

राजा के लिए उनकी जिंदगी एक सजा जैसी हो गई थी और जब वह थोड़ा समझने लायक हुए तो मात्र 17 साल की उम्र में वह अपने घर से अपनी जिंदगी संवारने के लिए भाग गए। वह अपने परिवार की मदद करना चाहते थे इसलिए वह मुंबई में नौकरी की तलाश में चले गए।

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लेकिन मुंबई जैसे बड़े शहर में उनका अपना कोई भी नहीं था ऐसे में यहां पर जीवन यापन करना उनके लिए बहुत मुश्किल था और वह वापस लौट आए।

वापस आने के बाद उन्होंने सोचा कि कुछ न कुछ काम शुरू किया जाये जिससे जीवन यापन किया जा सके। तो वह तिरूपुर से एक्सपोर्ट सरप्लस सर्च खरीद कर बेचने लगे और इससे उन्हें 5000 का मुनाफा हुआ। इसके बाद उन्हें जिंदगी में कई बार में उतार-चढ़ाव देखना पड़ा।

लेकिन 1998 में उन्होंने एक छोटा सा लॉजिस्टिक्स का बिजनेस शुरू कर दिया और आज उनकी एनसीएस लॉजिस्टिक्स कंपनी इंटरनेशनल शिपिंग में डीलिंग करने का काम करती है।

इसके अलावा उनकी कुछ और भी बिजनेस  हूं जैसे कि वह जल वेवरेज का काम भी करते हैं जो कि पीने के पानी की पैकिंग करने वाली कंपनी है।

उन्होंने ब्यूटी सैलून की चैन और स्पा का भी बिजनेस किया है और उनका ब्रांड है “पर्पल हेज”। आज उनके सभी करोबार से उन्हें सालाना 60 करोड का टर्नओवर आता है।

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इसके अलावा राजा एक एनजीओ भी चलाते हैं जिसके जरिए वह दलित और गरीब बच्चों के लिए काम करते हैं और कई सारे स्कूल और कॉलेज का संचालन करते हैं।

उनके कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के वजह से ही कर्नाटक में उन्हें कॉमर्स और इंडस्ट्रीज के दलित इंडियन चैंबर का अध्यक्ष भी बना दिया गया है। राजा द्वारा पढ़ने में अच्छे दलित बच्चों को 2 साल तक मुफ्त में आवासीय शिक्षा प्रदान की जाती है।

एक समय था जब दलितों को आरक्षण के बावजूद सफल होने की चिंता सताती रहती थी लेकिन राजा जैसे लोगों ने दलित वर्ग की नई पीढ़ी को प्रेरित करने का काम किया है और अपने सहयोग से उन्हें ऊपर उठाने का भी काम कर रहे हैं।

राजा की कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि गरीबी और अभाव चाहे जितना हो लेकिन अगर इंसान ठान ले तो वह हर परेशानी का सामना हिम्मत से कर सकता है और अपनी मंजिल का रास्ता तय कर के सफल हो सकता है, बस उसे अपनी कोशिशों को जारी रखना चाहिए।