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Amrita ji ke rajma chawal

नौकरी गंवाने के बाद बेघर दंपति ने शुरू किया राजमा चावल बेचना और कमा रहे हैं हर महीने 60 हजार

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आज हम बात करने जा रहे हैं करण और अमृता के बारे में, दोपहर के ठीक 12:30 बजे से 4:00 के बीच दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम के जंक्शन पर सफेद रंग की ऑल्टो कार आकर खड़ी होती है यह कार करण और अमृता की है।

इस दौरान करण और अमृता कार से बाहर निकलते हैं और डिक्की खोलते हैं और फटाफट अपने एप्रन पहन लेते हैं,  स्टील के कंटेनर को खोलते हैं, कंटेनर के खुलते ही गरम-गरम राजमा चावल, कढ़ी चावल और छास की  अद्भुत खुशबू आनी शुरू हो जाती है।

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जैसे ही यह अपनी कार लेकर अपनी सेवाओं को देने पहुंचते हैं वैसे ही थोड़ी भीड़ इकट्ठा हो जाती है और अपना खाना ऑर्डर करती है और फटाफट अपने ऑर्डर के लिए इंतजार करती है।

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि प्रतिदिन 100 से अधिक ग्राहक इनके पास आते हैं और इनके स्वादिष्ट राजमा चावल और अन्य खाद्य पदार्थों का का लाभ उठाकर जाते हैं।

दोनों दंपत्ति मिलकर अपने इस काम को प्रतिदिन दोहराते है परंतु रविवार के दिन उनका यह काम बंद रहता है।

एक कार जो देती है राजमा खानपान की सेवाएं

बातचीत के दौरान करण बताते हैं कि कई सालों से उन्होंने संसद सदस्य के लिए एक ड्राइवर का काम किया है परंतु कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी नौकरी छीन गई। करण बताते हैं कि उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की परंतु आगे पढ़ाई करने का प्रोत्साहन आर्थिक स्थितियों  के कारण विकसित नहीं हो पाया।

वह बताते हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण मेरी प्राथमिकता शुरू से ही पैसा कमाने की रही है। वह बताते हैं कि कुछ दिन बाद उनकी शादी अमृता से हो गई।

करण कहते हैं कि मैं अपनी पिछली नौकरी से प्रतिमाह 14 हजार का वेतन प्राप्त कर लेता था परंतु नौकरी के जाने के बाद आवश्यक चीजें तो पूरी हो जाती थी परंतु महामारी की चपेट में आने के बाद हमारा घर हमसे छीन गया था।

इस दौरान करण बताते हैं कि जिस प्रकार मेरी नौकरी छीन गई उसी प्रकार आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण मैं मुझे और मेरे परिवार को व्यक्तिगत रूप से मेरे माता पिता ने अस्वीकृत कर दिया।

परंतु इस विपत्ति भरी स्थिति में मेरे ससुराल वालों ने मेरा काफी साथ दिया उन्होंने नई नौकरी ना मिलने तक मुझे और मेरे परिवार को अपने घर में आश्रय दिया, इसके साथ ही साथ मेरे ससुर ने अपनी कार मुझे इस्तेमाल करने के लिए दे दी थी।

इसके साथ ही साथ करण कहते हैं कि हमने इन दिनों कई परिस्थितियों का सामना किया वह कहते हैं कि हम सारे दिन खुद को व्यस्त रखते हैं हम अन्य गुरुद्वारों में जाकर खाना खाते और इसके साथ ही साथ खुद की स्वच्छता के लिए सार्वजनिक शौचालय का उपयोग करते परंतु रात के समय में हम खुद को काफी अकेला महसूस करते।

करण की पत्नी अमृता कहती हैं कि हमने काफी दिन दुखद परिस्थितियों में बिताए परंतु हमने सोच लिया था कि अगर हम ऐसे ही अपना जीवन व्यतीत करेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे इस समस्या का हल करने के लिए हमने सोचा कि क्यों ना हम  खाद्य व्यवसाय शुरू कर दें।

अमृता और करण के राजमा चावल

अमृता ने खाद्य व्यवसाय शुरू करने के लिए राजमा चावल कढ़ी चावल और पकोड़े बेचने का सुझाव दिया था और इस दौरान करण उसकी इस बात से सहमत हो गया था ।

हमने पूंजी जुटाने के लिए अपनी अलमारी को बेच दिया इसके साथ ही साथ पिता और कुछ दोस्तों ने थोड़ी राशि का योगदान भी दिया था। वह कहती है कि हमने खाना पकाने की सारी सामग्री इकट्ठा करनी शुरू कर दी थी इसके साथ ही साथ खाना बनाने के लिए एक जगह को हमने मंडी हाउस में किराये पर ले लिया।


इस दौरान दोनों दंपत्ति सुबह उठते और खाना बनाने में लग जाते इस दौरान वह खाना बनाकर हम अपनी कार में जगह जगह पर जाकर ग्राहकों को ढूंढते परंतु लॉकडाउन की पाबंदियों ने हमारा काम काफी मुश्किल कर दिया था परंतु कुछ समय बाद तालकटोरा के स्टेडियम के पास हमें अपेक्षाकृत ग्राहक मिलने शुरू हो गए थे।

करण बताते हैं कि हमारे पास उतना अधिक मार्केटिंग ज्ञान नहीं था इसलिए हमने अपनी राजमा चावल और कढ़ी चावल की प्लेटों का मूल्य 30 से 50 रुपए रखा वह कहते हैं कि इस दौरान धीरे-धीरे हमारी ग्राहकी बढ़ती गई परंतु एक दिन एक यूट्यूब पर ब्लॉगर ने हमारे खाने की तारीफ करते हुए एक वीडियो को प्रकाशित कर दिया ।

उसके बाद हमारी ग्राहकी और अधिक बढ़ गई और आज हम प्रतिमाह आसानी से 60000 हजार कमा लेते हैं भले ही हमने इस काम को शुरू करने के लिए काफी समस्याओं का सामना किया परंतु आज हमारा यह बिजनेस सफल हो रहा है और आगे के कुछ दिनों में हम खुद का एक घर भी जरूर लेंगे।

दंपत्ति की साझेदारी से चल रहा है यह व्यापार

करण कहते हैं कि हालांकि हमने कई परिस्थितियों का सामना किया परंतु फिर भी हमने यह बिजनेस शुरू किया और आज हमारे बिजनेस अच्छा चल रहा है परंतु इस वक्त  ओमाइक्रोन वैरीअंट की शुरुआत हुई थी, उस वक्त हमारे व्यापार में फिर से थोड़ी गिरावट आई थी परंतु मेरी पत्नी ने मेरा साथ कभी भी नहीं छोड़ा वह हर कदम पर मेरे साथ रही।

करण कहते हैं कि व्यापार में उतार-चढ़ाव तो लगे ही रहते हैं परंतु जिस प्रकार मेरी पत्नी ने हर कदम पर मेरा साथ दिया है इन स्थितियों के कारण हमारा बंधन और भी अटूट हो गया है।

लेखिका : अमरजीत कौर

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