ADVERTISEMENT

आईएएस बनने के लिए 2 साल तक फोन से रहे दूर और पहले प्रयास में पाई 51 वी रैंक

IAS topper story in Hindi
ADVERTISEMENT

Success story of IAS topper Vikram grewal in Hindi :-

आज लाखों युवाओं का सपना होता है आईएएस बनना। इसके लिए लाखों अभ्यार्थी दिन-रात परीक्षा की तैयारी करते हैं।

अभी कुछ दिनों पहले आया यूपीएससी का रिजल्ट अभ्यार्थियों में दुगना जोश ला दिया है। यूपीएससी की तैयारी करने वाला हर अभ्यार्थी पूरे जोश के साथ तैयारी में जुटा है।

ADVERTISEMENT

आज हम जानेंगे यूपीएससी में पहले ही प्रयास में टॉपर की सूची में अपना नाम दर्ज कराने वाले और आईएएस बनने के लिए फोन से दूर रहने वाले विक्रम ग्रेवाल के बारे में।

विक्रम ग्रेवाल के पिता आर्मी में रह चुके हैं। ऐसे में हर 2 साल में उनके पिता का ट्रांसफर होता रहता था। जिसकी वजह से विक्रम को बार-बार अपना स्कूल बदलना पड़ता था।

ADVERTISEMENT

विक्रम बताते हैं कि बार-बार स्कूल बदलने के लिए उन्हें अक्सर ही प्रवेश परीक्षा के लिए बैठना होता था। इस तरह से उनके मन में किसी भी परीक्षा को लेकर डर नहीं था क्योंकि वह अक्सर ही परीक्षा देते रहते थे।

आईएएस बनने के लिए आर्ट विषय की पढ़ाई की

पढ़ाई में विक्रम ग्रेवाल बचपन से ही काफी होशियार रहे हैं। उन्हें स्कूल की पढ़ाई जाने वाली लगभग सभी विषयों में काफी रुचि रहती थी।

यही वजह थी कि वह हमेशा से पूरे मन से पढ़ाई करते थे। दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब स्ट्रीम चुनने का वक्त आया तब वह काफी असमंजस में थे क्योंकि उन्हें सारे ही विषय प्रिय थे।

आखिर में उन्होंने साइंस विषय का चयन किया और दसवीं की परीक्षा के बाद ही उन्होंने मन ही मन इस बात का फैसला ले लिया था कि वह सिविल सर्विसेज में जाएंगे।

विक्रम ने 12वीं की परीक्षा में 97% अंक हासिल किए हैं। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद विक्रम दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज में हिस्ट्री विषय में बैचलर की डिग्री हासिल की।

दसवीं और 12वीं साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के बाद जब बैचलर करने की बारी आई तब उन्होंने साइंस को छोड़कर आर्ट को चुना। तब उनके घर वाले उनके इस फैसले के खिलाफ थे और उन्हें काफी कुछ सुनाया गया।

लेकिन विक्रम पहले ही तय कर चुके थे कि उन्हें किस क्षेत्र में जाना है। इसलिए उन्होंने उसी आधार पर ग्रेजुएशन का विषय चुना और साइंस स्ट्रीम छोड़कर आर्ट स्ट्रीम में आने का फैसला किया।

शुरू से बना ली थी रणनीति

विक्रम ग्रेवाल बताते हैं कि वह यूपीएससी की सिविल सर्विसेज में आना चाहते थे। आने वाले भविष्य को ध्यान में रखते हुए 11 वीं कक्षा से ही वह सभी विषयों की एनसीईआरटी की किताबें इकट्ठा करना और उसे पढ़ना शुरू कर दिए थे।

जब वह ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे थे तब उन्होंने केवल ग्रेजुएशन की पढ़ाई पर ही अपना पूरा ध्यान लगाया। जैसे ही उनका ग्रेजुएशन पूरा हुआ वह अपने घर कुपवाड़ा चले गए और वहां से सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी पूरे जोश के साथ शुरू कर दी।

विक्रम ग्रेवाल बताते हैं कि यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी की शुरुआत उन्होंने एनसीईआरटी किताब से की।

2 महीने तक उन्होंने अपने अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट हिस्ट्री की तैयारी की। इस दौरान उन्होंने कोई दूसरा विषय नहीं पढ़ा।

यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने कोचिंग से नोट्स भी लिए बाकी उन्होंने सेल्फ स्टडी किया और सही रणनीति से अपनी तैयारी जारी रखी।

विक्रम बताते हैं कि वह न्यूज़पेपर नियमित रूप से पढ़ते थे साथ ही न्यूज़पेपर का वह नोट्स भी बनाते थे और समय-समय पर उसे रिवीजन करते रहते थे।

लगभग दो साल तक विक्रम ग्रेवाल ने यूपीएससी की तैयारी की। दो साल के बाद 2018 में विक्रम ग्रेवाल ने यूपीएससी सिविल सर्विसेज की परीक्षा के लिए अपना पहला एटेम्पट दिया।

पहले ही एटेम्पट में यूपीएससी की इस परीक्षा को विक्रम ग्रेवाल ने पास कर लिया और उन्हें पहले ही अटेम्प्ट में 51 रैंक मिली थी।

दूसरे अभ्यर्थियों को सलाह –

विक्रम ग्रेवाल जब सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे तब उन्होंने सोशल मीडिया के साथ-साथ फोन से भी पूरी तरह से दूरी बना ली थी। उन्होंने अपना एक टाइम टेबल बनाया था और उसी हिसाब से अपनी पढ़ाई रोजाना किया करते थे।

पढ़ाई के साथ-साथ वह कई सारे मॉक टेस्ट भी देते थे। मॉक टेस्ट देने का फायदा यह हुआ कि उन्हें अपनी कमियों को पहचानने में मदद मिली।

वह अपनी कमियों को समय रहते दूर किए और सफलता की तरफ आगे बढ़ते रहे। विक्रम ग्रेवाल का कहना है कि यूपीएससी की तैयारी में पढ़ाई करने के साथ-साथ रिवीजन करना और मॉक देना बेहद जरूरी है।

साथ ही आंसर राइटिंग प्रैक्टिस भी करते रहे तभी आप मुख्य परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन कर पाएंगे जो कि आप के अंतिम सिलेक्शन में महत्वपूर्ण रोल अदा करता है।

यह भी पढ़ें :

रवि जैन जो कभी अच्छी नौकरी किये करते थे अपनी शुरुवाती असफलता से हर नहीं माने और बने आईएएस

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *