नवम्बर 27, 2022

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प्रतिदिन ₹150 कमाने से ₹50,000 कमाने तक का प्रेरणादायक सफर

प्रतिदिन ₹150 कमाने से ₹50,000 कमाने तक का प्रेरणादायक सफर

प्रतिदिन ₹150 कमाने से ₹50,000 कमाने तक का प्रेरणादायक सफर, बाँस के हुनर ने बना दिया Businessman

आजकल देखा जाता है कि 16 साल की उम्र के बच्चे अपने कैरियर को लेकर प्लानिंग करते हैं कि आगे क्या करेंगे और क्या पढ़ाई करेंगे?

लेकिन ऐसे बहुत सारे बच्चे हैं जिन पर कम उम्र में ही घर और परिवार संभालने की जिम्मेदारी आ जाती है। कुछ ऐसे ही कहानी है नागालैंड के एक बिजनेसमैन की, जिन्हें 16 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ कर घर परिवार को चलाने के लिए काम करना शुरू करना पड़ा।

हम बात कर रहे हैं नागालैंड के रहने वाले रॉविलहोखो चूजों (Ruovilhoukho Chuzho) की, जिन्हें 16 साल की उम्र में साल 2005 में अपनी पढ़ाई घर के आर्थिक हालात सही न होने की वजह से छोड़नी पड़ी थी।

उनके पास पढ़ाई छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे। वह भी अपने पिता की तरह दिहाड़ी मजदूरी करने लगे और आजीविका के लिए खेतों में काम करने के साथ जंगल में लकड़ी काटने, जंगल को साफ करने और इस तरह अन्य कई छोटी-मोटी जगहों पर काम करना सुरु कर दिए थे।

Ruovilhoukho Chuzho चार भाई बहन मे से एक थे, जिन्होंने 12 वर्ष की उम्र में ही अपनी मां को खो दिया। घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नही थी। दो वक्त के लिए भोजन जुटाना मुश्किल होता था।

बहुत मुश्किल से उन्होंने खुद को समझा कर पढ़ाई छोड़ कर काम करना शुरू किया। शुरुआत में उन्हें काम के बदले ₹150 से ₹200 प्रतिदिन कमाई होती थी।

यह कहानी आज से लगभग 10 साल पहले की है। अब Ruovilhoukho Chuzho 29 साल के हो गये है और एक सफल बिजनेसमैन बन गए है।

कभी दिहाड़ी करने वाला यह लड़का आज तीन इंटरप्राइज का मालिक है जिससे उन्हें हर महीने 50000 की आमदनी हो रही है।

एक एक पैसा था कीमती :-

Ruovilhoukho Chuzho की आर्थिक स्थिति में साल 2012 तक कोई बदलाव नहीं आया था। एक दिन उन्हें कोहिमा में स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के बारे में जानकारी मिली।

जहां एक साल के कारपेंटर डिप्लोमा कोर्स कराया जा रहा था। उन्हें यह कोर्स कुछ आकर्षक लगा और उन्होंने इसे करने का फैसला किया।

Ruovilhoukho Chuzho Craft
Ruovilhoukho Chuzho Craft

वह बताते हैं कि उनके चाचा कोहिमा में रहते थे और प्रशिक्षण के दौरान उनके चाचा ने उन्हें अपने पास रखा। उनके चाचा उन्हें प्रशिक्षण के लिए संस्थान जाने के लिए उन्हें हर दिन ₹20 देते थे।

बजट बहुत सीमित था। केवल सुबह 7:30 बजे नाश्ता और रात में सीधे डिनर मिलता था। एक दिन के ₹20 में से यदि ₹5 भी कहीं एक्स्ट्रा खर्च हो जाते तो उन्हें घर पैदल जाना पड़ता था।

कई बार ऐसा भी हुआ जब उन्हें तेज धूप और बारिश में भीगते हुए घर जाना पड़ा था। इसलिए वह एक एक रुपए की कीमत अच्छी तरह से जानते हैं।

Ruovilhoukho Chuzho कारपेंटर का काम सीखने के बाद अपना खुद का काम करने का फैसला किया और घर लौट आये। कोई नौकरी नही थी तब उन्होंने अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। शुरू में कोई भी बैंकों ने कर्ज नहीं दे रहा था क्योंकि उनके पिता एक दिहाड़ी मजदूर थे।

वह आर्थिक रूप से भी इतने सक्षम नहीं थे कि कोई उपकरण खरीद सके। उनके पास सिर्फ उन्हें किराए पर लेने का विचार था। लेकिन बिना किसी आर्डर के ऐसा नहीं कर सकते थे।

सही प्रशिक्षण और Skill होने के बावजूद वह अपने घर की आर्थिक स्थिति नही सुधार पा रहे थे। साल 2013 में उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था क्योंकि उनकी एक भाई का निधन एक दुर्घटना में हो गई। वह भाई  मां के गुजरने के बाद उनके लिए सब कुछ था।

वही 7 से 11 वर्ष की उम्र तक उनके स्कूल की फीस भरा और सभी भाई बहनों का ध्यान रखता था। वह अपनी मां की जिम्मेदारी निभाता था। इसलिए वह Ruovilhoukho Chuzho के लिए बेहद खास था।

Bamboo Craft की Skill काम आयी :-

अपने भाई की मौत और कोई भी रोजगार न होने से वह डिप्रेशन में चले गए थे। साल 2014 में एक ऐसा वक्त आ गया था जवाब अपनी जिंदगी खत्म करने के बारे में सोच रहे थे। लेकिन फिर जैसे तैसे उन्होंने खुद को संभाला और खुद को सकारात्मक रखने की ठानी और संघर्ष में जुट गए।

कुछ साल बाद नागालैंड बाद संस्थान केंद्र द्वारा बांस शिल्प में निशुल्क परीक्षण प्राप्त करने का उन्हें एक और अवसर मिल गया। गांव के अध्यक्ष बाँस संस्थान केंद्र में प्रशिक्षित करने के लिए हर गांव से उम्मीदवार की तलाश कर रहे थे, तो Ruovilhoukho Chuzho वहां पर साइन अप कर लिया ।

उसी साल नागालैंड बास विकास एजेंसी ने उन्हें व्यवसाय करने के लिए उपकरण और मशीनरी देने के लिए भी तैयार हो गया।

Ruovilhoukho Chuzho बताते है कि उन्होने अपना व्यवसाय Ruovi craft collections तेनपी से शुरू किया। यह जगह उनके घर से 30 मिनट की दूरी पर थी।

शुरू में वह खिलौने, सजावटी सामान और पेन होल्डर जैसे उपयोगी उत्पाद बनाना शुरू किए जिसे नागालैंड बाँस संस्थान केंद्र द्वारा एंपोरियम में प्रदर्शित किया गया।

Ruovilhoukho Chuzho Craft
Ruovilhoukho Chuzho Craft

वहां पर अपने उत्पाद को बेचकर Ruovilhoukho Chuzho को ₹1500 की आमदनी हुई। जिसमें से उन्होंने 500 बचा कर शेष पैसे को दूसरी जरूरतों में लगा दिया। धीरे-धीरे उन्हें बड़े पैमाने पर आर्डर मिलने लगे और उनकी आमदनी दिन-ब-दिन बढ़ने लगी।

उनकी सफलता की कहानी जल्दी गांव में फैल गई। उनकी प्रेरक कहानी के लिए उन्हें स्थानीय एनजीओ Can youth से एक पहचान मिली। इसके कार्यक्रम के दौरान एक महिला ने उनसे संपर्क करके अपने बेटे को बंबू क्राफ्ट सिखाने का आग्रह किया।

उन्होंने हां कर दिया। तब उन्होंने उसे प्रशिक्षित किया। उसके बाद कई अन्य लोगों ने भी उनसे प्रशिक्षण लिया। साल 2016 के बाद अब तक उन्होंने 400 से अधिक लोगों को यह हुनर सिखा दिया है। इस प्रशिक्षण में 3 महीने तक मुफ्त में प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षण के दौरान खाना भी दिया जाता है।

Ruovilhoukho Chuzho ने अपने बिजनेस का नाम बदलकर THE NAGAJ FEETHER द नागज फ़ीदर रख दिया है और COLLECTION STORE नाम से उन्होंने एक दूसरा स्टोर खोलकर वहां पर अपने क्राफ्ट भेजते हैं

सहयोगी के रूप में पत्नी :-

Ruovilhoukho Chuzho की मुलाकात साल 2017 में Kevingo Sano से हुई जो अपना एक रेस्टोरेंट खोलना चाहती थी। बाद में उन्होंने शादी कर लिया और दोनो ने मिलकर Chopsticks ( चॉपस्टिक्स ) नाम का रेस्टोरेंट शुरू किया।

Ruovilhoukho Chuzho बताते हैं वह नूडल्स और डंपलिन बेचते हैं जिससे उन दोनों को संयुक्त रूप से ₹50,000 महीने की कमाई हो जाती है।

सकारात्मकता है जरूरी :-

Ruovilhoukho Chuzho बे पिता को सरकारी नौकरी मिल गई है। उनका छोटा भाई एक कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक स्टोर खोल लिया है। आर्थिक रूप से घर के हालात स्थिर हो गए हैं।

वह अपने व्यवसाय को विस्तृत करने की योजना बना रहे हैं। अब वह मशीनरी और उपकरण खरीदने में सक्षम है। वह लकड़ी के फर्नीचर पर काम करना चाहते हैं और बाँस शिल्प के निर्यात का विकल्प ढूंढ रहे हैं।

Ruovilhoukho Chuzho कहते हैं कि जीवन में सकारात्मकता सफलता का शुरुआती कदम होता है। उन्हें हमेशा नीचा दिखाया, वह लगातार नकारात्मकता से घिरे हुए थे और परिस्थितियों से जूझ रहे थे।

लेकिन सकारात्मकता और बेहतर जीवन की उम्मीद से वह लगातार संघर्ष कर रहे थे। सकारात्मकता का नतीजा यह हुआ कि वह एक सफल Businessman बन गये है।