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Jitendra Kumar gardener

आइए जानते हैं फूलों के शौकीन इस बिहार के सिपाही के बारे में जिन्होंने अपने घर पर उग आए हैं 500 से भी अधिक किस्मों के सजावटी फुल

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आज हम बात करने वाले बिहार के खगरिया के रहने वाले जितेंद्र कुमार के बारे में जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि जितेंद्र कुमार ने आर्मी से रिटायर होने के बाद गार्डनिंग को अपना शौक बना लिया और उस पर ही सबसे अधिक समय देना शुरू कर दिया ।

इतना ही नहीं आप गार्डन की सुंदरता का अनुमान इस प्रकार लगा सकते हैं कि हाल ही में जितेंद्र कुमार ने सोशल मीडिया पर अपने गार्डन की फोटो शेयर की थी और इस तस्वीर को 17 हजार से भी अधिक लोगों ने पसंद किया था ।

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जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि 1998 में जब जितेंद्र कुमार आर्मी में भर्ती हुए थे तब उन्हें अपनी नौकरी के कारण पौधे लगाने का समय नहीं मिल पाता था हालांकि जब वह छुट्टियों में अपने घर में आते थे तो कई मौसमी फूलों के पौधे को अपने घर पर लगा देते थे , साथ ही साथ वह अपने नौकरी में लौटने के बाद हमेशा फोन पर पौधों का हाल-चाल अपने घरवालों से अवश्य पूछते थे ।

लेकिन जब जितेंद्र कुमार वर्ष 2019 में अपनी आर्मी की नौकरी से रिटायर हुए तब उन्होंने घर पर रहकर अपना सारा समय गार्डन को देने का निश्चय किया और गार्डन को और भी अधिक खूबसूरत बनाने का निश्चय किया , जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि जितेंद्र कुमार ने अपने गार्डन को खूबसूरत बनाने के लिए नए-नए डिजाइन के गमले स्टैंड को खुद ही डिजाइन किया था ।

जितेंद्र ने अपने गार्डन पर पूरा ध्यान देना शुरू किया मैंने पौधों की किस्मों को लगाना पौधों की देखभाल करना यह सभी जितेंद्र घर पर रहकर करते हैं अर्थात आज जितेंद्र के छोटे से गार्डन में आज 500 से भी अधिक सजावटी फूलों की किस्म मौजूद है।

हालांकि आर्मी से रिटायर होने के बाद ही बिहार के खगरिया के एक बैंक में बतौर एक सिक्योरिटी गार्ड जितेंद्र कुमार की नौकरी लग गई परंतु फिर भी वह अपनी नौकरी से समय निकालकर अपने घर के गार्डन को खूबसूरत बनाने में लगे रहते थे।

बातचीत के दौरान जितेंद्र कुमार बताते हैं कि जब मैं आर्मी में था तब मैं अपने पौधों को कई महीनों तक नहीं देख पाता था हालांकि इस दौरान मैं वीडियो कॉल पर अपने पौधों को देख लेता था इस दौरान अब मैं अपनी रिटायरमेंट के बाद भले ही एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा हूं परंतु फिर भी मैं रोज अपने पौधों को अपनी नजर से देख सकता हूं और यह मेरे लिए काफी संतुष्टि है ।

इस प्रकार आया गार्डनिंग का शौक

जितेंद्र कुमार बताते हैं कि उनके घर में किसी को भी गार्डनिंग में उतनी अधिक रुचि नहीं थी परंतु बचपन से ही जितेंद्र को पेड़ पौधों से काफी अधिक लगाव था और यही कारण है कि उन्होंने 8 वर्ष की उम्र में बाहर जाकर पेड़ पौधे लगाए थे उसके बाद पेड़ पौधे लगाने का और पेड़ पौधों से जो जुड़ाव उनका हुआ वह आज तक नहीं गया है इस दौरान वह अपने गार्डन के साथ 4 से 5 घंटे बिताते हैं ।

जितेंद्र बताते हैं कि उनके घर पर उनकी छत में अर्थात छत के नीचे में पौधे लगाने के लिए काफी अच्छी जगह है जिसमें वह डहेलिया, पेटूनिया, अडेनियम की 50 किस्में अर्थात इसके साथ ही साथ गुलाब सहित अन्य मौसमी फूलों के 25 से भी अधिक किस्में उनके पास मौजूद है , इतना ही नहीं जितेंद्र ने अपने गार्डन में सजावटी फूलों को भी रखा है जिनमें से कुछ एग्लोनीमा की पंद्रह, सिंगोनियम की नौ अर्थात फन की नौ किस्म उन्होंने रखी है।

जितेंद्र बताते हैं कि वह जब भी ट्रेनिंग के लिए महाराष्ट्र जाते थे वहां पुणे की नर्सरी से सजावटी फूलों के पौधों को खरीद लेते थे साथ ही साथ जितेंद्र का कहना है कि उनके घर पर सब्जियां और फल नहीं उठते इसलिए वह अपने घर पर सजावटी फूल और मौसमी फलों को लगाते हैं जिससे उनके घर के गार्डन की खूबसूरती काफी अधिक बढ़ गई है ।

सोशल मीडिया पर भी उनके गार्डन को काफी अधिक प्यार मिलता है

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि जितेंद्र कुमार अपने इलाके के गार्डन इन ग्रुप के सदस्य भी है हर रविवार गार्डन इन ग्रुप के सदस्य मिलकर गार्डनिंग की अन्य जानकारियों के बारे में चर्चा करते हैं साथ ही साथ जितेंद्र कुमार अपने गार्डन की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं अर्थात यह तस्वीरें ना केवल भारत के लोगों द्वारा अर्थात विदेश के कई लोगों द्वारा काफी अधिक पसंद की जाती है।

 

लेखिका : अमरजीत कौर

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