नवम्बर 30, 2022

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Kisan Kamaljeet Singh Hayer ki safalta ki kahani

पिता और भाई की मौत को झेलने के बाद वकालत छोड़ दी , शुरू की प्राकृतिक खेती बन गए हैं अब सबके रोल मॉडल

आज हम बात करने वाले हैं पंजाब के रहने वाले कमलजीत सिंह हेयर की, परिवार में पिता और भाई की मौत होने के बाद इन्होंने अपनी वकालत की नौकरी को छोड़ दिया और प्राकृतिक खेती को अपनाने की प्रेरणा ली ।

इस प्रेरणा को अपने जीवन में उतार कर उन्होंने अपने 20 एकड़ जमीन को खेती के लिए इस प्रकार विकसित कर लिया है कि अब वे सभी किसानों के आदर्श बन चुके हैं।

खेती एक ऐसा पेशा है, जिसमें आप समय के साथ प्रयोग करें तो निश्चित ही मुनाफा आपको मिलेगा। भारत देश के कई हिस्सों में ऐसे किसान है जो अपनी कृषि की तकनीकों में बदलाव लाना चाहते हैं और उन्नति करना चाहते हैं।

पंजाब के रहने वाले कमलजीत सिंह हेयर कृषि क्षेत्र में अपनी मेहनत और उन्नति के बल पर कई किसानों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं। अपनी प्राकृतिक खेती के रोल मॉडल से कई लोगों को प्रभावित किया है और कई लोगों को प्राकृतिक खेती के लिए शिक्षित भी किया।

कमलजीत सिंह हेयर फिरोजपुर जिला के सोहनगढ़ रत्तेवाला गांव के रहने वाले हैं। 45 साल के कमलजीत सिंह के पास 20 एकड़ जमीन है जिस पर वह  प्राकृतिक खेती करके सरसों, बाजरा, ब्लैक राइस, रेड राइस, अंगूर, आलू, टमाटर और 50 से अधिक तरह की फसलों को उगाते हैं इसके अलावा  आम, आंवला, जामुन, बैर, नारंगी जैसे फलो को  भी उगा रहे हैं।

कमलजीत बताते हैं कि वह पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से खेती करते हैं और वह लोगों को इसकी जानकारी देने के लिए और अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित करने के लिए अपना एक ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट भी खोल कर रखा है जिसमें वह किसानों को प्राकृतिक खेती करने के सही तरीके बताते हैं।

कमलजीत बताते हैं कि वह सब्जियों फलों के अलावा पारंपरिक फसलों जैसे तुलसी स्टीविया लेमन ग्रास जैसे 50 से अधिक औषधियों को भी उग आते हैं। इसके साथ ही साथ कमलजीत पशु पालन भी करते हैं और गाय भैंस बकरी बत्तख इत्यादि को पालते हैं।

कमलजीत बताते हैं कि वे खेती-बाड़ी शुरू करने से पहले वकालत करते थे वह बताते हैं कि मैंने जब वकालत की नौकरी को छोड़ कर खेती बड़ी करने का निश्चय लिया तब मेरी वकालत की सैलरी डेढ़ लाख थी परंतु फिर भी मैंने परिवार की स्थितियों को संभालने के लिए परिवार के साथ रहकर खेती-बाड़ी करने का निश्चय किया।

इस प्रकार मिली थी प्रेरणा

कमलजीत बताते हैं कि साल 1996 में मेरा सबसे छोटा भाई जो केवल 10 वर्ष का था और ब्रेन ट्यूमर से अचानक उसकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद में बताते हैं कि वर्ष 2006 में मेरे पिताजी हार्ट अटैक से चल बसे।

इसके बाद वह कहते हैं कि मेरे पिताजी और मेरा छोटा भाई बहुत ही कम उम्र में चल बसे उस समय मैंने सोचा कि लोग इतनी जल्दी लोग कैसे मर रहे हैं इतनी जल्दी आसिमक  मौतें कैसे हो रही है।

वो कहते हैं कि यही समय था जब मैंने प्राकृतिक कृषि संस्था से बातचीत की और मुझे एक आश्चर्य करने वाली बात पता चली वह कहते हैं कि संस्था ने मुझे बताया कि पंजाब में केवल 1.5 खेती युक्त जमीन है और केमिकल और खादो के इस्तेमाल से इसका आंकड़ा 18 फ़ीसदी हो गया है। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम जो खाना खा रहे हैं वह कितना जहरीला है।

कमलजीत सिंह हेयर बताते हैं हैदराबाद में उनकी मुलाकात कृषि क्षेत्र में जाने-माने वैज्ञानिक ओम प्रकाश रूपेल से हुई थी ।

इस दौरान वह बताते हैं कि 2009 में पंजाब में डॉक्टर रूपेल किसानों की खेती के लिए एक नया मॉडल लेकर आए थे परंतु वह मॉडल फेल हो गया था उसके बाद डॉक्टर रुपेल  2012 मैं पंजाब आए और इस पर उन्होंने अपनी रणनीति में कई बदलाव लाया था।

बताते हैं कि उन्होंने कृषि क्षेत्र के मशहूर वैज्ञानिक को अपनी प्रेरणा मानकर 2013 में 20 एकड़ जमीन पर प्राकृतिक खेती करनी आरंभ कर दी थी।

उनका कहना है कि उनकी खेती युक्त जमीन में बरसों से केमिकल युक्त खेती की जा रही थी अब अचानक से प्राकृतिक खेती करना बहुत मुश्किल था।

इस दौरान वह बताते हैं कि डॉक्टर ओमप्रकाश ने उन्हें यह सलाह दी थी कि खेती पेड़ पौधों पक्षियों  सूक्ष्म जीवों का एक मेल है अगर इसे सही तरह से समझ कर अपनाया जाए तो फसलों को जहरीला होने से बचाया जा सकता है।

इस प्रकार करते हैं खेती

कमलजीत बताते हैं कि वे खेती के लिए बीजों को कभी भी बाहर से निर्यात नहीं करते हैं बल्कि वह फसलों के बीजों को खुद से ही तैयार करते हैं।

इस दौरान वो कहते हैं कि बारिश के पानी का इस्तेमाल करने के लिए और बारिश के पानी को बचाने के लिए उन्होंने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को भी तैयार किया है।

इसके साथ ही साथ कमलजीत कहते हैं कि हमने पशुपालन के लिए गाय भैंस और बत्तख एवं मुर्गियों को भी रखा हुआ है और इनकी देखभाल के लिए उन्हें बाहर से कुछ भी खरीदना नहीं पड़ता और इनके मल मूत्र को हम खेती में खाद के रूप में उपयोग में लाते हैं और पशुपालन और खेती पूरी तरह से एक दूसरे पर आश्रित है।

बताते हैं कि हम कीटनाशक के रूप में जीवामृत का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही साथ उनका कहना है कि हमारे खेत में कुछ भी बेकार नहीं जाता है सड़े गले सभी पदार्थों का उपयोग करके बायोगैस को तैयार कर लेते हैं।

इस प्रकार करते हैं मार्केटिंग

कमलजीत सिंह हेयर बताते हैं मैं अपने उत्पादों को डायरेक्ट बेचने के बजाय प्रोसेसिंग में ज्यादा ध्यान देता हूं वह कहते हैं जैसे कि काले चने का उत्पाद करके उसका बेसन बनाकर बेचने में ज्यादा मुनाफा है। इसके अलावा बताते हैं कि मैं फलों से अचार और मुरब्बे को तैयार करके बेचता हूं इस तरह कमाई अधिक हो पाती।

कमलजीत सिंह हेयर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर खुद तो लाखों का मुनाफा कमा ही रहे हैं इसके साथ ही साथ एक ट्रेनिंग सेंटर को बनाकर अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती की शिक्षा भी देते हैं और उन्हें इनके लिए प्रेरित भी करते हैं।

कमलजीत सिंह हेयर ने अपने खेतों को कृषि वैज्ञानिक ओम प्रकाश को समर्पित करते हुए हुए अपनी कृषि का नाम डॉ. ओम प्रकाश रुपेला सेंटर फॉर नैचुरल फार्मिंग” नाम रखा है।

कमलजीत सिंह हेयर अपनी प्रेरणा कृषि वैज्ञानिक ओम प्रकाश को मानते हैं और अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित करते हैं।

 

लेखिका : अमरजीत कौर

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