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बेटे को किसान बनाने के लिए एक मां ने छोड़ी सरकारी नौकरी

बेटे को किसान बनाने के लिए एक मां ने छोड़ी सरकारी नौकरी

अपने बेटे को किसान बनाने के लिए एक मां ने छोड़ी Government Job

यह सुनने में अजीब लगेगा कि एक मां अपने बेटे को किसान बनाना चाहती है और उसके लिए उसने अपने Government Job भी छोड़ दी है। इस मां ने अपनी बेटे को किसान बनाने के लिए ₹90 हजार महीने की तनखा वाली अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी है।

 जी हां हम बात कर रहे हैं राजस्थान के अजमेर जिले में रहने वाली चंचल कौर की। चंचल  रेलवे अस्पताल अजमेर में उत्तर पश्चिम रेलवे में Chief matron के पद पर नियुक्त थी, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को किसान बनाने के लिए अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और खेती करने लगी। वह अपने बेटे को किसान बनाना चाहती हैं।

पहले के Old fashioned की बात छोड़िए आज के जमाने में भी ज्यादातर लोग अपने बच्चे को किसान नहीं बनाना चाहते हैं, बल्कि उसे अच्छी शिक्षा देकर शहर में बसाने का सपना देखते हैं। खुद अपने बारे में चंचल कौर का कहना है कि वह किसान की बेटी है लेकिन उनके पापा नहीं चाहते थे कि वह या उनके भाई बहन किसानी करें।

उनके पापा ने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी और सभी ने सरकारी नौकरी हासिल की, चंचल कहती हैं कि वह अपने बचपन से सुनती आई हैं कि अगर ठीक से पढ़ाई नहीं करोगे तो अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी और फिर खेती करनी पड़ेगी। एक जमाना था जब अनपढ़ लोग या फिर जिन्हें कोई काबिलियत नहीं होते थे वो लोग खेती करते थे, लेकिन अब वक्त बदल गया है।

अब कैरियर का क्षेत्र बदलने की जरूरत नहीं है बल्कि अपनी सोच और नजरिए को बदलने की जरूरत है। खेती के जरिए भी उन्नति की जा सकती है फिर वह चाहे गांव हो या शहर, यह वाधा नहीं बनेगा।

 चूँकि भारत एक agricultural country है इसलिए कैरियर के विकल्प के रूप में हमेशा से यह लोगों के लिए विकल्प के रूप में रहा है।

 वक्त के साथ New technology विकसित हुई और इनोवेशन हुए हैं , लेकिन इसके बाद भी आज भी कोई माता-पिता यह नहीं चाहेंगे कि उनका बच्चा खेती करें। लेकिन अजमेर के रहने वाले राजेंद्र सिंह और उनकी पत्नी चंचल कौर अपने बेटे को किसान बनाना चाहती हैं।

इसके लिए उन्होंने इंदौर के पास एक गांव में डेढ़ एकड़ जमीन खरीदी है और अपने बच्चे को आधुनिक शिक्षा देने के साथ ही खेती और किसानी का भी माहौल देने की कोशिश कर रही हैं।

 इस बारे में राजेंद्र सिंह का कहना है कि कुछ साल पहले जब उनकी बहन को कैंसर हुआ और उसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गई तब डॉक्टर ने कैंसर की सबसे बड़ी वजह आजकल की लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, केमिकल युक्त खाना आदि को वजह बताया। 

उसके बाद उनका नजरिया बदल गया वह यह सोचने लगे कि शहर में लाखों रुपये भले ही कितना भी पैसा कमा ले लेकिन अगर जीवन स्तर अच्छा नहीं है और खाने पीने को स्वच्छ पानी, साफ हवा, धूप न मिले तो पैसे कमाने का कोई मतलब नहीं है।

Natural farming
खेती के जरिए भी उन्नति की जा सकती है फिर वह चाहे गांव हो या शहर, यह वाधा नहीं बनेगा।

बस इसीलिए उन्होंने पास के गांव में जमीन खरीद ली और उनकी पत्नी ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। शुरू में उनके रिश्तेदारों और साथ के अफसरों ने उनके इस कदम को बेवकूफी भरा कहा लेकिन वह अपने बेटे को लग्जरी लाइफ के साथ-साथ एक स्वच्छ और स्वस्थ जीवन देना चाहती थी।

 चंचल सादा जीवन जीने में यकीन करती हैं और अपने बच्चे को भी सादा जीवन जीना ही सिखा रही है। इस दंपत्ति ने अपने साथ-साथ अपने 11 साल के बेटे गुरबख्श सिंह को भी Natural farming की ट्रेनिंग दी है और Solar cooking, सोलर ड्राइविंग, जीरोवेस्ट लाइफस्टाइल जीने की कला भी सिखा रही हैं।

उन्हें अपने बेटे को देख कर खुशी होती है जब वह जिंदगी खुलकर जी रहा होता है। अब वह जैविक खेती के साथ ही सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा पूरे मन से लाता है और उसके गांव में ढेर सारे दोस्त हैं, जिन्हें सोलर कुकिंग या फिर खेती करने के तरीके सिखाता है। उसे जानवरों से भी बेहद लगाव है।

 राजेंद्र कहते हैं कि आजकल के लोग शिक्षा और रहन-सहन पर लाखों रुपए खर्च करते रहते हैं लेकिन अपने बच्चे को वक्त नहीं दे पाते हैं। राजेंद्र और चंचल के बस यही कोशिश है कि वह अपने बच्चे को जीने का एक नजरिया दे सके और ज्यादा से ज्यादा वक्त अपने बेटे के साथ बिता सकें। अब इन तीनों की जीवनशैली प्रकृति से जुड़ गई है।