नवम्बर 27, 2022

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mukesh kumar sovam crop ki safalta ki kahani

mukesh kumar sovam crop ki safalta ki kahani

एलोवेरा से मिली नई पहचान सरकारी नौकरी छोड़कर करने लगे बिजनेस

आज के युवा सरकारी नौकरी के लिए परेशान है। अगर सरकारी नौकरी किसी को मिल जाती है तो इस बात की चर्चा गांव और मोहल्ले में होती है।

लेकिन अगर कोई अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करें तो लोग तब भी बाते करते है। आज हम आपको एक ऐसे शख्स से रूबरू  करवाएंगे जिसने अपनी सरकारी नौकरी को छोड़ कर बिजनेस करना शुरू किया।

जी हां आज की यह कहानी है राजस्थान के मुकेश कुमार बहरोड़ की। कुछ साल पहले तक वह सरकारी विभाग में नौकरी करते थे। फिर मुकेश ने नौकरी को छोड़कर पूरी तरह से बिजनेस करना शुरू कर दिया।

जब मुकेश कुमार ने नौकरी छोड़ी थी तो लोगों ने तरह-तरह की बातें की। लेकिन आज लोग उनकी मिसाल देते हैं। लोग अपने बच्चों को उनके तरह बनने की सलाह देते हैं क्योंकि आज मुकेश एक सफल बिजनेसमैन बन गए हैं।

मुकेश अपने साथ साथ 80 लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाए हैं। मुकेश की कंपनी Sovam crop science private limited  है। वह औषधीय फसलें सीधे किसानों से खरीदते हैं और हर्बल उत्पाद बनाकर बाजार में बेच रहे हैं।

ऐसे शुरू किया था बिजनेस :-

मुकेश ने अपना यह बिजनेस मात्र तीस हजार की लागत के साथ शुरू किया था। आज उनका सालाना टर्नओवर 4 करोड़ से भी अधिक है। मुकेश बताते हैं कि वह जयपुर के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखते हैं। वह सरकारी स्कूल में पढ़े हैं।

ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने एमबीए की डिग्री हासिल की। इसके दौरान उन्होंने यह फैसला कर लिया था कि वह बिजनेस करेंगे। लेकिन उनके ऊपर घर की जिम्मेदारियां थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह प्राइवेट नौकरी करते हैं।

फिर जल्दी उनकी नौकरी ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर के पद पर लग जाती है। यह एक सरकारी नौकरी थी। लेकिन नौकरी करने के दौरान मुकेश को लगा कि जो वह करना चाहते थे वह नहीं कर पाते हैं। सरकारी नौकरी से परिवार की जरूरतें पूरी हो सकती है और कुछ नहीं।

इसलिए साल 2012 में उन्हें अपने सरकारी नौकरी छोड़ दी। यह एक बहुत बड़ा रिस्क था। लेकिन उन्हें खुद पर विश्वास था कि वह बिजनेस के क्षेत्र में कामयाब हो सकते हैं।

वह किसान परिवार से संबंध रखते हैं। उन्हें आईडिया था कि क्रश क्रॉप से किस तरह से पैसा कमाया जा सकता है। इसी दौरान उन्हें अपने दोस्त से मिलने जाने का मौका मिला जो एलोवेरा  की खेती करता था। मुकेश को पता था कि एलोवेरा के पल्प की मार्केटिंग करने से अच्छा कमाया जा सकता है।

30,000 की लागत से शुरू किया बिजनेस :-

मुकेश बताते हैं कि जब उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी तो वे उसकी प्रोसेसिंग कर के अलग-अलग समूह से उत्पाद खरीद कर बाजार पहुंचाने लगे। इस तरह उन्होंने अपनी 30,000 की बचत के साथ एक बिजनेस शुरू किया और जयपुर में एक ऑफिस किराए पर ले लिया।

वह किसानों से उनके उत्पाद को लेते और कंपनियों से जुड़ते गए। एक डेढ़ साल बीत जाने के बाद उनकी मेहनत रंग लाई। अच्छी खासी बचत होने लगी।

उन दिनों हर्बल उत्पादों की ट्रेडिंग के बारे में उन्होंने सोचा और खुद का उत्पाद बनाकर ग्रहको तक पहुंचाने का विचार उनके मन में आया।

Sovam Aloevera

उन्होंने सोचा कि इससे दूसरों पर उनकी निर्भरता खत्म हो जाएगी और गुणवत्ता को भी बरकरार रखा जाएगा। साल 2016 में उन्होंने अपनी खुद की कंपनी शुरू की।

मुकेश कहते हैं कि पहले मैंने अलग-अलग किसानों से संपर्क किया और किसानों से एलोवेरा, अश्वगंधा, लेमनग्रास, त्रिफला, तुलसी जैसे फसलें सीधे किसानों से लेने लगा।

आज वह किसानों से लगभग 12 प्रकार की अलग-अलग फसलें लेते है। किसानों को बाजार जाने की जरूरत नहीं है। वह किसानों को उनकी फसल की एवज में अच्छा धाम देते हैं।

आज उनकी कंपनी 500 से भी ज्यादा हर्बल उत्पाद बना रही है और इन उत्पादों को वह लगभग 400 कंपनियों को बेच रहे हैं।

मांग के हिसाब से वह खुद उत्पाद तैयार करते हैं और लोगों तक पहुंचाते हैं। इसके लिए वह उत्पाद चेक करने के बाद अपने ब्रांड के साथ मार्केटिंग करते हैं।

चार करोड़ का है टर्नओवर :-

मुकेश बताते हैं कि पिछले साल कोरोना वायरस के दौरान इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में एलोवेरा जूस, त्रिफला जूस, गिलोय जूस आदि की मांग काफी बढ़ गई।

बल्क में उनके पास आर्डर आने लगे। सालाना टर्नओवर उनका चार करोड़ पहुंच गया और लोगों को इस बात पर यकीन नहीं होता है कि तीस हजार की लागत के साथ शुरू हुआ बिजनेस कैसे आज करोड़ों कमा रहा है। मुकेश  कहते हैं कि यह सब लगातार मेहनत और लगातार सीखने सीखते रहने का नतीजा है।

शुरू में हुआ नुकसान :-

मुकेश कहते हैं कि जब उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू की थी तो उन्हें पहले पहले नुकसान झेलना पड़ा क्योंकि उत्पाद सही तरीके से तैयार नहीं हो रहे थे। मुकेश ने हार मानने के बजाय काम को सीखने का फैसला किया और खुद प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग ली।

दो तीन फार्मासिस्ट को काम पर रखा था जिससे बाजार की मांग के हिसाब से उत्पाद तैयार हो सके और उत्पाद ग्राहकों के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा हो। उन्होंने उत्पाद की गुणवत्ता पर ध्यान दिया साथ ही मार्केटिंग पर भी ध्यान दिया।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उठाया लाभ :-

मुकेश ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का भी फायदा उठाया। उन्होंने अपने बिजनेस को इंडियामार्ट, ट्रेडमार्क जैसे होलसेल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर किया।

जिससे उनके बिजनेस को आगे बढ़ाने में मदद मिली। वह बताते हैं कि इंडियामार्ट के माध्यम से हर रोज दो से तीन क्लाइंट उनके पास आते हैं, जो होलसेल मार्केटिंग का काम करते हैं।

इसके अलावा वह ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेज़न, फ्लिपकार्ट के जरिए भी ग्राहकों से जुड़े हुए हैं। उनका मानना है कि आज के समय में कम से कम निवेश करके बिजनेस को प्रमोट किया जा सकता है। ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म काफी ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते हैं।

युवाओं को संदेश :-

मुकेश का कहना है कि ऑनलाइन स्पेस का प्रयोग फिल्में देखने और वेब सीरीज देखने के लिए युवाओं को नहीं करना चाहिए बल्कि इससे रोजगार के अवसर ढूढ  सकते हैं।

अगर आपको नौकरी नहीं मिल रही है तो खुद का बिजनेस शुरू करने पर ध्यान लगाएं और सरकार की तरफ से कृषि विज्ञान केंद्र, सामाजिक संगठनों के माध्यम से कई प्रकार के कौशल विकास प्रशिक्षण दिए जा रहे है।

युवा इनका लाभ उठाकर अपने खुद के कौशल को तराश सकते हैं और ट्रेनिंग लेकर छोटे स्तर पर अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे कोशिश करने से इस बिजनेस को वह बड़ा कर सकते हैं और लाखों, करोड़ों रुपए कमा सकते हैं।

 

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