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महिलाओं को रोजगार देने के मकसद से मां-बेटी की जोड़ी ने खड़ा कर लिया मसाले का Business

महिलाओं को रोजगार देने के मकसद से मां-बेटी की जोड़ी ने खड़ा कर लिया मसाले का Business

महिलाओं को रोजगार देने के मकसद से मां-बेटी की जोड़ी ने खड़ा कर लिया मसाले का Business

Pragya Agarwal जो दिल्ली में रहती है, एक दिन उन्होंने अपनी Maid पार्वती के चेहरे पर चोट के कई निशान देखें। चोट के निशान देखकर वह काफी परेशान हुई।

कई दिनों तक सोचने विचारने के बाद उन्होंने पार्वती से चोट के बारे में पूछा। प्रज्ञा को जिसका डर था वही हुआ। पार्वती को चोट घरेलू हिंसा के दौरान लगी थी।

हालांकि पार्वती जैसी महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा आम बात थी क्योंकि ये महिलाएं पति को कभी जवाब नही देती थी।

लेकिन Pragya Agarwal ने पार्वती को समझाया कि घरेलू हिंसा एक गंभीर समस्या है और इसके लिए उन्हें आवाज उठानी होगी। तब पार्वती ने कहा कि हमारे पति हमारा घर चलाते हैं, अगर हम विरोध करेंगे तो वह हमें छोड़ देंगे।

बता दे कि Pragya Agarwal पहले सोशल सेक्टर (social sector) में काम करी थी, इसलिए उन्हें भारत में घरेलू हिंसा की घटनाओं के बारे में पता था। खासकर के निम्न आय वर्ग में घरेलू हिंसा की घटनाएं अधिक देखने को मिलती है।

हालांकि पैसा की इसमे महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि ज्यादातर महिलाएं अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ इसलिए आवाज नही उठाती है क्योंकि उन्हें डर होता है कि उनके आवाज उठाने से उनके पति उन्हें छोड़ देंगे।

तब Pragya Agarwal ने ऐसी महिलाओं को आजीविका में लगा कर मदद करने के बारे में सोचा। सबसे पहले प्रज्ञा ने पार्वती को पापड़ बनाने के लिए कच्चा माल खरीदने में मदद किया और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बताकर पर्वती के उत्पादों को बेचने में मदद की।

आज पार्वती Organic Condiments ( Orco.in ) की एक प्रमुख सदस्य बन गई है। यह एक ऑर्गेनिक मसालों का ब्रांड है जिसे Pragya Agarwal और उनकी 25 वर्षीय बेटी Advika agarwal चला रही है।

मां बेटी की जोड़ी का मकसद वंचित महिलाओं को सशक्त बनाना है। प्रज्ञा कहती हैं कि उन्होंने इसकी शुरुआत 2017 में की थी। वह बताती हैं कि अब तक उन्होंने लगभग 100 से अधिक महिलाओं को रोजगार में लगा चुकी है।

महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता जरूरी

(Financial independence of women is important ) :-

अपने बिजनेस के मजबूती के बारे में वह बताती हैं कि महिलाओं की Financial Independence बेहद जरूरी है। वित्तीय स्वतंत्रता उनके बिजनेस की एक तरह से नींव है।

वह बताती है कि हमारे यहाँ सभी उत्पाद हाथों से बनाये जाते है। ये 100 फीसदी प्राकृतिक उत्पाद होते हैं। जब भी आप हमारे सामान खरीदते हैं तो इस माध्यम से आप सैकड़ों महिलाओं के जीवन में अप्रत्यक्ष रूप से बदलाव ला रहे होते है।

पार्वती के बारे में वह बताती हैं कि अब पार्वती हर महीने लगभग ₹7000 कमा लेती है। वह अभी अपने पति के साथ ही रह रही है।

लेकिन अब वह वित्तीय रूप से निश्चित हो गई है और घरेलू हिंसा पर रोक भी लग गई है । पार्वती को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने पति से पैसे नहीं मांगने पड़ते।

प्रज्ञा की बेटी आध्विका ने पहचानी क्षमता ( Pragya’s daughter Aadhvika recognizes potential ):-

पार्वती के व्यवसाय क्षमता को सबसे पहले प्रज्ञा की बेटी आध्यविका ने पहचाना और उसके बाद 2016 में उन्होंने 4 और महिलाओं को जोड़ लिया।

उस समय आध्विका कैल्फोर्निया में एंटरप्रेन्योर फेलोशिप पूरा करके भारत वापस आई थी। वह अपना इंटर्नशिप पूरा करके अपना Bussiness शुरू करना चाहती थी।

उन दिनों ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते उसने इस क्षेत्र में काम करने का फैसला किया। उसने अपने उत्पाद में मसाले को प्रमुख उत्पाद के रूप में चुना क्योंकि पीढ़ियों से भारतीय लोग मसाले घर में ही बनते रहे हैं।

मां बेटी की जोड़ी अपने उत्पाद में किसी भी प्रकार का समझौता नही करना चाहती थी। इसलिए उन्होंने कच्चे माल की आपूर्ति के लिए कई ऑर्गेनिक सर्टिफाइड किसानों को पता किया।

उत्पादों को बेचने के लिए खुदरा विक्रेता और दुकानदारों से संपर्क किया। एक बार बाजार में पहचान बना लेने के बाद उन्होंने अपने उत्पाद को ऑनलाइन बेचने में शुरू कर दिया है और अधिक महिलाओं को काम पर रख लिया है।

इसमें पार्वती ने काफी मदद की। पार्वती जिस इलाके में रहती थी। वहां पर यह बात तेजी से फैल गई और कई महिलाएं उनके बिजनेस से जुड़ गई। महिलाएं को काम पर रखने के साथ प्रज्ञा ने उन्हें काम करने का तरीका भी सिखाया।

ORCO की खासियत (ORCO’s Specialty ): –

ORCO मे सभी मसालों को जीना बिना किसी प्रिजर्वेटिव या कृतिम रंग के बनाया जाता है। इसे बनाने में साफ सफाई का ध्यान रखा जाता है और मसालों को पत्थर से कूट कर चक्की में उसका पाउडर बनाते हैं।

मसाले बनाने की प्रक्रिया में दो महिलाएं, कच्चे माल को हाथ से साफ करती हैं फिर उसे पत्थर से कूटा जाता है और इसके बाद चक्की में उसका पाउडर बनाते हैं।

इसके मसाले का उपभोग करने वाले उपभोक्ता अनुराग शर्मा बताते हैं “मैं उनके उत्पादों का ढाई साल से ऑनलाइन ऑर्डर करता हूं, सामान्य रूप से मै गरम मसाला और हल्दी मंगाता हूं, क्योंकि यह मसाले हाथों से बनाए जाते हैं, तो इनका मूल स्वाद और सुगंध बनी रहती है।

इसलिए इसके उत्पादों को को खरीदने में कोई दुविधा नही होती है। वेंचर द्वारा हाथ से बने पेपर पैकिंग का इस्तेमाल होता है जो की पूरी तरह से इको फ्रेंडली है।

इसमें हर दिन औसतन 20 तरह के लगभग 100 किलो मसाले बनते हैं। ब्राउन मस्टर्ड, हिमालयन पिंक साल्ट, आमचूर चाय मसाला जैसे विशेष उत्पादकों को बनाने के लिए शेफ भी रखे गए है।

प्रज्ञा नए-नए बाजार की तलाश कर रही हैं। जल्दी महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के क्षेत्र में भी अपना वेंचर खोलने की योजना बना रही है।

इनके वेबसाइट पर सुपर फूड और ड्राई फूड भी उपलब्ध है पहले ग्राहकों की संख्या लगभग 25 ही थी, लेकिन अब इनके वेबसाइट पर लगभग हर 30,000 विजिटर हर महीने आ जाते हैं।

प्रेरणा ( Inspiration from the story ) : –

इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें सशक्त बना सकते हैं। इसके लिए हमें आसपास ही कोई न कोई अवसर ध्यान से देखने पर नजर आ जाता है। पूरी निष्ठा के साथ जब कोई काम किया जाता है तो उसमें धीरे-धीरे ही सही कामयाबी मिल जाती है