नवम्बर 29, 2022

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पाँच सितारा होटलों में सेफ के रूप में काम करने के बाद अब यह सेफ मुंबई की सड़कों पर फाइव स्टार बिरयानी बना कर बेंच रहा आइये जानते हैं क्यों..?

पाँच सितारा होटलों में सेफ के रूप में काम करने के बाद अब यह सेफ मुंबई की सड़कों पर फाइव स्टार बिरयानी बना कर बेंच रहा आइये जानते हैं क्यों..?

पाँच सितारा होटलों में सेफ के रूप में काम करने के बाद अब यह सेफ मुंबई की सड़कों पर फाइव स्टार बिरयानी बना कर बेंच रहा आइये जानते हैं क्यों..?

सड़कों के किनारे बिकने वाले खाने को अक्सर लोग बीमारियों का घर मानते हैं, लेकिन मुंबई के दादर स्थित एक फूड वेंचर अपने ग्राहकों को सड़क के किनारे ही फाइव स्टार क्वालिटी सा खाना उपलब्ध कराने का काम कर रहा है।

इस “5 स्टार बिरयानी” फूड वेंचर की शुरुआत 29 वर्षीय अक्षय पारकर ने की है। पहले अक्षय ताज ग्रुप आफ होटल्स और इंटरनेशनल क्रूज में बतौर सेफ के रूप में नौकरी भी कर चुके हैं।

लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते उनकी नौकरी अचानक से छीन गई। अचानक से नौकरी चली जाने के बाद वो काफी निराश हो गए थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नही हारी और खुद को एक वेंचर “5 स्टार बिरियानी शुरू करने का फैसला किया।

अक्षय पारकर बताते हैं कि उनके माता-पिता की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही है। उनकी मां का घुटना टूटा हुआ है और कोहनी में भी चोट लगी है।

इसलिए कोहनी और घुटने का ऑपरेशन हुआ है। उनका पहले एक आटा मिल हुआ करता था लेकिन आटा मिल बंद हो जाने के बाद उनके पिता के पास अब कोई काम नही है और इन दिनों वह टीबी की बीमारी से जूझ रहे हैं।

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लगातार बीमारियों का इलाज करवाने के चलते अक्षय के घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी और इससे निपटने के लिए उन्होंने वही किया जो वह सबसे बेहतर कर सकते थे।

अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ अक्षय एयरलाइंस क्षेत्र में काम करने के उद्देश्य से साल 2010 में ताज ग्रुप आफ होटल्स में इंटर्नशिप किए थे और 2013 में उन्होंने इंटरनेशनल क्रूज साथ एक अनुबंध किया था, जिसके तहत उन्हें हर महीने $1000 मिल रहे थे।

लेकिन सारे पैसे माता पिता के इलाज में ही खर्च हो जाते थे। उम्र अधिक होने की वजह से पहले की बीमारियां भी एक कारण बनी जिसकी वजह से उनके माता-पिता का स्वास्थ्य बीमा नही हो सकता था और इलाज अधिक महंगा होता गया।

अक्षय पारकर की नौकरी से सब कुछ सामान्य रूप से सब ठीक ठाक ही चल रहा था लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस महामारी शुरू हो गई और उसकी वजह से अक्षय और उनकी तरह कई अन्य लोगों की नौकरी चली गई।

नौकरी चले जाने के बाद अक्षय को लगा कि इतने वर्षों के संघर्ष के बाद अपने माता-पिता के लिए इलाज के लिए कुछ पैसे बचा पाऊंगा लेकिन उनके पास सेविंग के नाम पर सिर्फ 20000 बचे थे।

परिवार में मां, बाप और अक्षय ही हैं, उन्हें संभालने के लिए अक्षय को कुछ न कुछ करना ही था। तब उन्होंने अपनी कुकिंग स्किल का इस्तेमाल किया और अपने परिवार की देखभाल के साथ कारोबार शुरू कर दिया।

पडोसी का बड़ा पाव का ठेला जब बंद हुआ तो पडोसी ने वो दुकान अक्षय को दे दी। वह घर से ही बिरयानी तैयार करके ले जाते हैं और शाम को नुक्कड़ पर बेंच देते हैं।

अक्षय पारकर ने अपने इस बिजनेस को शुरू करने के लिए अपने कई दोस्तों और रिश्तेदारों से आर्थिक मदद भी मांगी, लेकिन परिस्थितियां खराब होने के चलते कोई भी उनकी मदद के लिए तैयार नही हुआ।

सितंबर के पहले हफ्ते के दौरान अक्षय ₹10000 खर्च करते हैं और चिकन और मटन बिरयानी के अलावा वेज और पनीर बिरयानी का ठेला लगाते हैं, जिससे उन्हें ठीक ठाक आमदनी हो जाती है।

वेज बिरयानी को वह ₹800 किलो और पनीर बिरयानी को ₹1200 प्रति किलो की दर से बेचते हैं। चिकन बिरयानी ₹900 किलो और मटन बिरयानी ₹1500 किलो देते हैं।

आज अक्षय पारकर के पास लगभग 30 ग्राहक रोजाना आते हैं। अक्षय अपने ग्राहकों के लिए बिरयानी के अलावा पर्सनल आर्डर पर बटर चिकन, उत्तर भारतीय व्यंजन भी बनाते हैं।

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शुरुआत के दिनों में अक्षय हर दिन करीब 5 किलो बिरयानी बेचते थे, लेकिन आज वह 7 किलो से भी अधिक बिरयानी बेच डालते हैं। अक्षय बताते हैं कि वीकेंड के दौरान उनके पास ज्यादा ग्राहक आते हैं।

अभी अक्षय ज्यादा लाभ पर ध्यान नही दे रहे हैं क्योंकि वह क्वालिटी को बनाये करना चाहते हैं, जो उन्होंने फाइव स्टार होटलों में सीखा है।

अक्षय पारकर इन दिनों नई जगह की भी तलाश कर रहे हैं, जिससे वे अपने बिजनेस को बढ़ा सकें, इसके अलावा उन्होंने ऑनलाइन फूड ऐप पर भी रजिस्टर करने की कोशिश की है, जल्दी अक्षय की बिरियानी ऑनलाइन ऑर्डर पर भी उपलब्ध हो जाएगी।

सबसे खास बात यह है कि अक्षय ने अभी तक मार्केटिंग के लिए कोई भी पैसा खर्चा नही किया है। उनके कुछ दोस्तों और चचेरी बहनों ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिए ही उनकी बिरयानी का प्रचार किया, जो उनके लिए काफी मददगार साबित हुई।

अक्षय की चचेरी बहन कहती हैं कि अक्षय की बिरयानी में हाइजीन के उच्च मानक को देखते हुए उन्होंने उसके बारे में फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्ट लिखा और अधिक से अधिक लोगों को इसके बारे में बताने की कोशिश की। उन्हें खुशी है कि इससे अक्षय का बिजनेस बढ़ रहा है।

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अक्षय पारकर का इरादा है अपने बिजनेस को नया आयाम देना है। अब वह दोबारा नौकरी नही करना चाहते है। अक्षय कहते हैं कि वह अपने ग्लैमरस नौकरी पर वापस नही जाना चाहते हैं बल्कि अपने बिजनेस को ही जारी रखना चाहते हैं क्योंकि उनके माता-पिता को भी उनके सख्त जरूरत है और उनके स्वास्थ्य को देखते हुए वह किसी भी प्रकार का जोखिम नही उठाना चाहते।

अक्षय पारकर की कहानी से हमे यह प्रेरणा मिलती है कि अगर हम कुछ करना चाहते हैं तब हमें अपने हुनर के दम पर कोई न कोई आईडिया मिल ही जाता है, जिसे हम अपने रोजगार का जरिया भी बना सकते हैं और अपने परिवार की देखभाल भी कर सकते हैं।