दिसम्बर 1, 2022

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Safalta ki sachi kahani

आइए जानते हैं बाप बेटे की अनोखी सफलता की कहानी , बाप-बेटे दोनों ने नीट की परीक्षा में सफलता हासिल करके रचा नया इतिहास

आज हम आपको बाप बेटे की ऐसी सफलता की कहानी बताने वाले हैं जिसे जानकर आप भी कहेंगे कि वाह क्या बात है , जानकारी के लिए आप सभी को बता दें वर्ष 2019 में होने वाली नीट की परीक्षा में मधुर कटियार ने में चौथी रैंक के साथ सफलता हासिल की थी साथ ही साथ महत्वपूर्ण रूप से आपको यह भी बता दें कि मधुर कटियार की ओबीसी कोटे के तहत 97 वी रैंक आई थी , एवं मधुर कटियार ने वर्ष 2019 में होने वाली नीट की परीक्षा में ऑल इंडिया के तहत 443 वी रैंक हासिल की थी ।

मधुर पढ़ाई को लेकर काफी अधिक महत्वकांक्षी थे इसलिए उन्होंने सदैव ही सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी ना ही उनका सोशल मीडिया से कोई संपर्क नहीं था और ना ही उनका फेसबुक अकाउंट और ना ही इंस्टाग्राम अकाउंट था ।

यहां हमने आपको मधुर कटियार के बारे में तो बता दिया है अब हम आपको उनके पिता के बारे में जानकारी देंगे , जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि मधुर के पिता का नाम अवधेश कटियार है , मधुर के पिता अब देश ने जब नेट की परीक्षा दी थी तब वर्ष 1991 में उन्होंने नीट की परीक्षा में ऑल ओवर इंडिया में 400 वीं अंक हासिल की थी।

इसके बाद मधुर के पिता अवधेश ने झांसी से एमबीबीएस की पढ़ाई की और उसके बाद वह डॉक्टर बन गए , मधुर के पिता अवधेश अकबरपुर जिला चिकित्सालय में फिजिशियन के तौर पर मरीजों को अपनी सेवा दे रहे हैं , अर्थात मधुर की माता नीलम कटियार एक हाउसवाइफ है ।

इस कहानी को पढ़ने के बाद आप सोच रहे होंगे कि इसमें सफलता की क्या बात है तो जानकारी के लिए आप सभी को बता देगी पिता अवधेश की नीट परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद पूरे 28 साल बाद अवधेश के बेटे मधुर ने नेट की परीक्षा में सफलता हासिल की है एवं नीट की परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद इन्होंने अपने पिता का नाम रोशन कर दिया है ।

केवल मधुर ही नहीं अपने पिता का नाम रोशन कर रहे हैं बल्कि मधुर की छोटी बहन भी मेडिकल की पढ़ाई में अधिक रूचि रखती है इस तहत वह आगे जाकर अपने पिता का नाम अवश्य रोशन करेगी ।

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि मधुर का पूरा परिवार मूल रूप से विनायकपुर में रहता है , मधुर के पिता अवधेश बताते हैं कि जब बेटे का नीट की परीक्षा का रिजल्ट आया तो मुझे काफी प्रसन्नता हुई क्योंकि बचपन से ही मेरा बेटा मेरी तरह डॉक्टर बनना चाहता था , और मैंने बचपन से ही इसके सपने को पूरा करने के लिए इसकी हर एक बात को काफी गंभीरता से लिया है ।

इस दौरान मधुर बताते हैं कि पिता के साथ से ही वह आज नेट की परीक्षा में सफलता हासिल कर एमडीएस की पढ़ाई पूरी करेंगे और अपने पिता जैसा एक अच्छा डॉक्टर बन पाएंगे ।

मधुर के पिता अवधेश बताते हैं कि मधुर बचपन से ही अपनी पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर रहा है अर्थात दिया है अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इतना कारागार था कि इसने कभी भी सोशल मीडिया पर ध्यान नहीं दिया और ना ही कभी सोशल मीडिया अकाउंट खोले यह शुरू से ही मेरी तरह बनना चाहता था इसलिए उसने पूरी गंभीरता से अपनी पढ़ाई में ध्यान दिया और आज सफलता हासिल करने के बाद यह मधुर के लिए काफी प्रसन्नता की बात है ।

मधुर बताते हैं कि आज मेरे इस मुकाम पर पहुंचने की कहानी पूरी तरह से मेरे पिता पर निर्भर करती अगर मेरे पिता मेरे लिए प्रेरणा स्रोत नहीं बनते तो आज मैं यहां नहीं होता साथ ही साथ मधुर के पिता अवधेश कहते हैं कि बेटी पर भी पूर्ण विश्वास है आगे जाकर हमारा नाम अवश्य रोशन करेगी ।

लेखिका : अमरजीत कौर

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