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बिहार का यह लड़का एप्पल गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों को अपने आविष्कार के जरिए मात दे रहा

बिहार का यह लड़का एप्पल गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों को अपने आविष्कार के जरिए मात दे रहा

बिहार का यह लड़का एप्पल, गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों को अपने आविष्कार के जरिए मात दे रहा

कहा जाता है कि सपनों का पीछा करना एक कठिन काम है लेकिन कुछ भी काम न करना सबसे बड़ी मूर्खता होती है।

बहुत सारे लोगों के सपने बिखर जाते हैं क्योंकि लोग सपना पूरा करने के लिए सही वक्त का इंतजार करते हैं और अपने लिए अवसर ही ढूंढते रहते हैं।

वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो विश्वास करते हैं कि बिना खुद कुछ किये कभी भी सफलता नही मिल सकती है। अपने सपनो को पूरा करने के लिये मेहनत करनी होगी।

कुछ ऐसे ही सोच रखते हैं बिहार के रहने वाले Siddhant Vats की। सिद्धांत ने एक उद्देश्य को लक्ष्य मानकर अपने हाई स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी और गेम के जरिए एप्पल, सैमसंग, नोकिया जैसे दूसरे स्मार्टफोन को भी मात देने लगे।

इस युवा शख्स के नाम कई सारी उपलब्धियां दर्ज हैं, लेकिन सबकी अलग-अलग वजह है लेकिन सब के पीछे जो एक सबसे बड़ी वजह है।

वह अपने जुनून को जारी रखना और अपने जुनून पर सामाजिक दायित्वों को हावी न होने देना की बात पर अमल करते है।

Siddhant Vats का जन्म और पालन-पोषण बिहार में हुआ। 19 साल की उम्र में सिद्धांत अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर विश्व की पहली एंड्राइड स्मार्ट वॉच बनायी और इसी के साथ पूरी दुनिया में तहलका मच गया।

विदेशी लोगों ने Siddhant Vats की बनाए स्मार्ट वॉच को हाथों-हाथ खरीद लिया। स्मार्ट वॉच के बारे में उनके कई सारे आर्टिकल लिखे गए। यह स्मार्ट वॉच स्मार्टफोन, कंप्यूटर और जीपीएस डिवाइस का एक सम्मिलित रूप है।

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यह अपने आप में एक असाधारण बात है कि गूगल एप्पल जो अपनी स्वयं की स्मार्ट वॉच विकसित कर रहे हैं उसकी घोषणा के एक हफ्ते के अंदर ही सिद्धांत ने अपना स्मार्टवॉच लांच कर दिया था और बिना ज्यादा खर्चे के मात्र तीन दोस्तो के साथ मिल कर उन्होंने यह कारनामा कर के दिखा दिया था ।

Siddhant Vats की उपलब्धियां इस बात की गवाह है कि यदि अपनी रूचि और जुनून के बल पर कोई व्यक्ति कुछ भी हासिल करना चाहता है तो उसके लिए पारंपरिक शिक्षा की जरूरत नहीं होती है।

जब Siddhant Vats ने स्कूल छोड़ने का फैसला लिया था तब उसके लिए उनके माता-पिता बिल्कुल भी तैयार नहीं थे।

लेकिन जल्द ही उन्होंने यह बात महसूस की कि सिद्धांत का विश्वास पूरी तरीके से मजबूत है। कोई भी नई टेक्नोलॉजी का इंतजार करना सही नहीं होगा,  रही बात शिक्षा की तो शिक्षा तो बाद में भी हासिल की जा सकती है।

Siddhant Vats और उसके तीन दोस्तों ने मिलकर एक स्मार्ट वॉच बनाई जिसमें फोटो लेने के लिए 2 मेगापिक्सल का कैमरा भी लगा हुआ था ।

यह डिवाइस ब्लूटूथ, अच्छी स्टोरेज, अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी और ढेर सारी एप्स को डाउनलोड करने की क्षमता रखती है।

जब बच्चे सारा दिन अपना वक्त खेल के मैदान में गुजारते थे, उन दिनों Siddhant Vats अपने माता-पिता द्वारा चलाए जा रहे एनजीओ में गरीब बच्चों को कंप्यूटर, इंग्लिश तथा गणित पढ़ाया करते थे।

आज Siddhant Vats लंदन में पढ़ाई कर रहे हैं और अपने उत्साह और ज्ञान के जरिए लोगों के बीच फेमस भी हो चुके हैं।

वह एक अंतरराष्ट्रीय मठ बोधगया में बनाना चाहते हैं जिससे फॉरेन इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा और बिहार के टूरिज्म को भी फायदा मिलेगा।

बता दें कि Siddhant Vats को साल 2015 में प्रतिष्ठित लार्ड बेडेन पावेल नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा वह TEDx मे स्पीकर के तौर पर भी जा चुके हैं।

इतनी सी कम उम्र में इतनी ऊंचाइयां हासिल करके सिद्धांत आज हर युवा शक्ति के लिए एक मिसाल बन गए हैं। Siddhant Vats जैसे सोच रखने वाले बच्चों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में बहुत मदद की है।