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महाराष्ट्र का एक किसान ने सफेद चंदन और काली हल्दी की खेती करके बनाई अपनी पहचान

महाराष्ट्र का एक किसान ने सफेद चंदन और काली हल्दी की खेती करके बनाई अपनी पहचान

महाराष्ट्र का एक किसान ने सफेद चंदन और काली हल्दी की खेती करके बनाई अपनी पहचान

एक वक्त था जब खेती को अनपढ़ लोगों के लिए रोजगार का जरिया समझा जाता था लेकिन आज के दौर में पढ़े लिखे लोग भी खेती में अपना नाम कमा रहे हैं।

लेकिन अब बस अंतर यह है कि वह पारंपरिक तरीके से हटकर कुछ अलग ढंग से खेती करते हैं और खेती के जरिए लाखों कमा रहे हैं।

हमारी आज की कहानी है महाराष्ट्र के लातूर जिले के रहने वाले Dhananjay Rawat की, जो हमेशा से ही खेती के क्षेत्र में ही कुछ विशेष करना चाहते थे।

खेती के क्षेत्र में ही कुछ विशेष करना चाहते थे:

Dhananjay Rawat के पिता अन्य दूसरे किसानों की तरह सामान्य पारंपरिक ढंग से खेती किया करते थे। लेकिन धनंजय खेती में कुछ अलग करने की ख्वाहिश रखते थे।

इसके लिए पहले उन्होंने Agriculter Department ( एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट )  से Polyhouse  लगाने की ट्रेनिंग ली। उनका कहना है कि पारंपरिक तरीके से खेती करने से ज्यादा बचत नही होती।

धनंजय रावत के नर्सरी में चन्दन के पौधे
धनंजय रावत के नर्सरी में चन्दन के पौधे

ऐसे में उन्होंने एक ऐसे रास्ते की तलाश थी जिसमें कम पानी लगता हो औऱ अच्छे नतीजे मिले। बता दें कि लातूर में पानी की समस्या है ऐसे में वह हाईटेक खेती करना चाहते थे जिसमें पानी की खपत कम हो।

Polyhouse की ट्रेनिंग करने के दौरान  Dhananjay Rawat की मुलाकात केरल से आए एक लड़के से होती है। धीरे-धीरे उनकी काफी अच्छी दोस्ती हो गई और वो खेती के विषय पर विचार विमर्श करने लगे।

तब उन्हें चंदन की खेती के बारे में पता चला लेकिन वह पहले इस बात को लेकर गंभीर नही थे। लेकिन जब ट्रेनिंग के दौरान Dhananjay Rawat लखनऊ गए थे।

तब उन्होंने एक एक्सपर्ट से पूछा कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किस चीज को उगाना फायदेमंद होगा, तब उन्हें जवाब मिला चंदन की खेती सूखा प्रभावित क्षेत्रों में की जा सकती है।

तब वह अपने केरल के दोस्त से मिलने का विचार बना कर उसके यहां चले गए जहां पर उन्हें पता चला कि उसके पिता डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट ऑफिसर हैं । उन्होंने Dhananjay Rawat को अपने डिपार्टमेंट में चंदन के अलग-अलग पेड़ दिखाएं।

यहीं पर Dhananjay Rawat को पता चला कि चंदन के एक पेड़ की कीमत करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए होती है। पहले तो धनंजय को विश्वास नही हुआ कि चंदन का पेड़ इतना महंगा कैसे बिक सकता है।

लेकिन बाद में उनके पिता ने काफी कुछ समझाया और बताया कि Sandalwood Farming कमर्शियल तरीके से किसान कैसे कर सकते हैं।

इसके बाद Dhananjay Rawat अपने गांव लातूर लौट गया और वहां पर 1 एकड़ जमीन में 200 चंदन के पेड़ लगा दिए क्योंकि चंदन की कमर्शियल वैल्यू बहुत ज्यादा होती है ।

इसलिए वह खेती के लिए कृषि विभाग से भी मदद देने लगे। इस दौरान अन्य दूसरे लोग भी Sandalwood के पेड़ उगाने की मांग करने लगे।

Sandalwood के पेड़ों की बढ़ती मांग से Dhananjay Rawat के मन में विचार आया कि क्यों न इसके पौधे तैयार किए जाएं जो आसानी से नहीं मिलता था।

धनंजय 10 एकड़ जमीन में करीब 3000 Sandalwood के पेड़ लगाए हैं बाकी इसके नर्सरी का काम भी करते है।

Dhananjay Rawat कहते हैं कि शुरू में उन्होंने कम से शुरुआत की थी लेकिन अब वह हर साल लगभग 6 लाख चंदन के पौधे तैयार कर के बेचते हैं।

Sandalwood के पेड़ का मूल्य इस बात पर निर्भर करता है कि पेड़ कितना बड़ा है। Dhananjay Rawat कहते हैं कि किसान अपने खेतों में चंदन के पेड़ के साथ अन्य दूसरे उत्पादों की खेती भी कर सकते हैं।

Sandalwood के पेड़ में बीमारी लगने का खतरा भी काफी रहता है लेकिन ज्यादातर बीमारियों पर कंट्रोल किया जा सकता है।

इसके लिए समय-समय पर इसके पेड़ों पर नीम, हल्दी, अदरक, गोमूत्र से बने पेस्टिसाइड बनाकर इसके पेड़ों पर छिड़काव करना पड़ता है जिससे बीमारी न लगे।

सफेद चंदन के पेड़ से लगभग 20 साल बाद लकड़ी मिलती है। इसलिए कोई भी किसान इस पर निर्भर नहीं हो सकता।

इसलिए अच्छा तरीका है कि एक एकड़ में दूर-दूर Sandalwood का पेड़ लगाया जाए और उसमें दूसरी फसलें भी उगाई जाए जैसे की चीकू, सीताफल आदि। इसमें साथ में काली हल्दी की भी खेती की जा सकती है।

Sandalwood के साथ Black Turmeric की खेती:

Dhananjay Rawat अपने खेतों में चंदन के पेड़ के साथ Black Turmeric ( काली हल्दी ) भी उगाते हैं। Black Turmeric की मांग बहुत ज्यादा है। इसलिए उन्हें बाजार ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती।

धनंजय रावत के नर्सरी में काली हल्दी  के पौधे
धनंजय रावत के नर्सरी में काली हल्दी के पौधे

घर से ही सारी हल्दी बिक जाती है और इसे वह बहुत ज्यादा ऊंची कीमत पर बेचते हैं। ज्यादातर आयुर्वेदिक कंपनियां किसानों से काली हल्दी खरीदती है।

Black Turmeric की कीमत एक से दो हाजर रुपये प्रति किलो होती है। काली हल्दी के लिए किसान छोटे स्तर से शुरुआत कर सकते हैं उसके बाद खुद ही अपना बीज बना सकते हैं।

10 से 15 पौधे से Black Turmeric की खेती की शुरुआत की जाए तब इसे बाद में बढ़ाकर अपनी बीज बना सकते हैं।

Black Turmeric कन्द की तरह होता है ऐसे में इसे उस जगह पर लगाना चाहिए जहां पर पानी का ठहराव न होता हो।

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वही Sandalwood की लकड़ी काटने के लिए वन विभाग या फिर अपने जिले के कलेक्टर या तहसीलदार से एनओसी लेनी होती है।

जो कि आसानी से मिल जाती है क्योंकि अगर जिन पेड़ों को खुद उगाया गया हो उसकी लकड़ी काटा जाए तो एनओसी मिल जाती है।

लोग Sandalwood की खेती इसलिए नहीं करते क्योंकि इसमें 20 से 25 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है लेकिन इसमें मुनाफा भी काफी होता है।

इसलिए Sandalwood Farming के साथ साथ दूसरी फसले उगाना और इसकी खेती करना फायदेमंद होता है। किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते है।