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Success story of IAS Dipankar Choudhury in Hindi

Success story of IAS Dipankar Choudhury in Hindi

दीपांकर ने इस तरह से अपने चौथे प्रयास में IPS से IAS का सफर तय कर अपना सपना पूरा किया

Success story of IAS Dipankar Choudhury : –

दीपांकर चौधरी मूल रूप से झारखंड के रहने वाले हैं। इनका बचपन झारखंड में ही बीता है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यहीं से पूरी की है। इसके बाद वह दिल्ली आगे की पढ़ाई करने के लिए आ गए थे।

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद दीपांकर चौधरी ने साल 2015 में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की डिग्री पूरे होते ही उनकी नौकरी लग जाती है और वहां ज्वाइन कर लेते हैं।

लेकिन कुछ समय तक नौकरी करने के बाद दीपंकर का मन सिविल सेवा परीक्षा देने का होता है और वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का मन बना लेते हैं।

दीपंकर चौधरी का यूपीएससी का सफर :-

दीपंकर ने साल 2016 से ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। अपने पहले दो प्रयास में दीपांकर को असफलता का सामना करना पड़ा। लेकिन शुरुआती असफलता के बाद भी उन्होंने अपना धैर्य बनाए रखा और अपना प्रयास जारी रखा।

उन्होंने अपनी गलतियों से सीख ली और उन्हें सुधारा। फिर तीसरे प्रयास में दीपांकर को सफलता मिली। तीसरे प्रयास में दीपांकर को 166 वीं रैंक के साथ आईपीएस सेवा अलॉट होती है। दीपांकर यह मौका गवाना नहीं चाहते थे।

इसलिए उन्होंने आईपीएस की नौकरी को ज्वाइन कर लिया। हालांकि जॉइनिंग के बाद भी दीपांकर यूपीएससी की तैयारी करते रहे।

क्योंकि आईपीएस बनने के बाद दीपांकर का सपना पूरा नही हुआ था। वह आईएएस बनना चाहते थे और अपने इस सपने को पूरा करने के लिए वह आईपीएस बनने के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखें।

सही रणनीति दिलाई सफलता:-

सही दिशा में सही रणनीति और कड़ी मेहनत के बदौलत दीपांकर चौधरी को उनके चौथे प्रयास में कामयाबी मिली और उनका आईएएस बनने का सपना पूरा हो गया। दीपांकर चौधरी ने अपने चौथे प्रयास में 42 वी रैंक हासिल की थी।

42 वी रैंक के साथ दीपक चौधरी को आईएएस का पद मिल जाता है और इस तरह से उनका सपना पूरा हो जाता है।

अपने इस सपने को पूरा करने के लिए और आईएएस बनने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की। अपनी गलतियों को पहचाना और उन्हें सुधार किया। तब जाकर वह अपना सपना पूरा कर सके।

पढ़ाई को लेकर तनाव नहीं :-

दीपंकर का कहना है कि यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए किताबों को लेकर ज्यादा तनाव नहीं पालना चाहिए। क्योंकि तनाव परीक्षा की तैयारी में असर डालता है। इसलिए वह किताबों को लेकर कभी भी ज्यादा तनाव नहीं लेते थे।

वह आसानी से उपलब्ध होने वाली बेसिक किताबों को ही अपनी तैयारी का आधार बनाएं और फेमस राइटर की किताबों से ही अपनी यूपीएससी की तैयारी की है। वह करंट अफेयर्स की तैयारी के लिए मंथली मैगजीन के साथ-साथ नियमित रूप से अखबार पढ़ते थे।

दूसरे अभ्यर्थियों को सलाह :-

वह यूपीएससी की तैयारी करने वाले सभी अभ्यार्थियों को मंथली मैगजीन और नियमित रूप से अखबार पढ़ने की सलाह भी देते हैं। इसके अलावा दीपांकर चौधरी मॉक टेस्ट भी देते थे।

वह कहते हैं कि मॉक टेस्ट देने से खुद को एनलाइस करने का मौका मिलता है और इस तरह से अपनी गलतियों को समय रहते सुधारा जा सकता है।

दीपांकर चौधरी का मानना है कि यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से पढ़ाई करने के साथ-साथ रिवाइज करना बहुत जरूरी है।

यूपीएससी की परीक्षा में रिवीजन बहुत ज्यादा मायने रखता है। क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि बहुत सारे अभ्यार्थी बहुत सारा मैटर इकट्ठा करके उसे पढ़ते हैं लेकिन रिवीजन पर ध्यान नहीं देते हैं।

नतीजा यह होता है कि एग्जाम में उन्हें सब कुछ आते होते हुए भी सही ढंग से लिखने नहीं आता और वह अपना आंसर सही और सटीक शब्दों में नहीं लिख पाते हैं।

नतीजा उन्हें यूपीएससी में असफलता का सामना करना पड़ता है। यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए लगातार पढ़ाई के साथ-साथ रिवीजन पर भी उतना ही फोकस करने की जरूरत होती है।

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