नवम्बर 30, 2022

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Success story of IAS Officer Bala Nagendran in Hindi

एक टैक्सी वाले के नेत्रहीन बेटे ने यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए किताबों की भाषा को ब्रेल भाषा में ट्रांसलेट करके की पढ़ाई

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि बाला नागेंद्रन भले ही नेत्रहीन थे परंतु वह पढ़ाई में काफी होशियार थे और पढ़ाई लिखाई में उनकी इस लगन को देखते हुए उनके एक शिक्षक ने उन्हें सिविल सर्विस की तैयारी करने का सुझाव दिया था ।

किसी ने तो यह बात सही कही है जो मनुष्य अपनी कमियों पर कार्य करता है वही सफलता हासिल कर पाता है , कुछ इसी प्रकार की कहानी है आईपीएस ऑफिसर बाला नागेंद्रन , परंतु आईपीएस ऑफिसर बाला नागेंद्रन की सफलता की कहानी कुछ अलग है क्योंकि इनकी कहानी उन व्यक्तियों में आती है जो अपनी कमियों पर विजय हासिल करके आईपीएस की परीक्षा में सफलता हासिल करते हैं ।

केवल इतना ही नहीं जानकारी के लिए आप सभी को बता दे  आईपीएस ऑफिसर बाला नागेंद्रन की कहानी उन लोगों के लिए काफी अधिक प्रेरणादायक है जो शारीरिक रूप से किसी भी प्रकार से दिव्यांग है और यह सोचते हैं कि वह अपने जीवन में कुछ नहीं कर सकते हैं‌।

बाला बचपन से ही नेत्रहीन रहे हैं

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि बाला नागेंद्रन तमिलनाडु के रहने वाले हैं , अर्थात यह बचपन से ही नेत्रहीन है , हालांकि इन्होंने कभी भी अपनी इस कमजोरी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया है , केवल इतना ही नहीं इनकी यह कमजोरी कभी भी इनकी सफलता के सामने नहीं आई है ।

बाला के पिता चलाते थे टैक्सी

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि बाला ने अपनी स्कूली शिक्षा लिटिल फ्लावर कान्वेंट स्कूल और राम किशन मिशन से पूरी की थी , बाला ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद चेन्नई से ले गए और चेन्नई के लोयला कॉलेज से उन्होंने बीकॉम की डिग्री हासिल की थी।

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि बालक के पिता भारतीय सेना के रिटायर ऑफिसर हैं , अर्थात पिता ने रिटायरमेंट के बाद चेन्नई में ही टैक्सी चलाने का कार्य शुरू कर दिया था जिससे घर की रोजी रोटी चलती थी ।

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए किताबों की भाषा को ब्रेल भाषा में बदला

जैसे कि हमने आपको पहले ही बताया कि बाला पढ़ाई में काफी अधिक होशियार हैं इसलिए उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना संजोया था और इसके लिए उन्होंने सबसे पहले किताबों की भाषा को ब्रेल भाषा मैं बदला , इस दौरान भले ही उन्हें कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा परंतु उनके जज्बे ने उनको रोका नहीं और इस दौरान उनकी आगे की राह आसान हो गई।

9 वें प्रयास में हासिल की सफलता

बाला के लिए यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल करने की राह इतनी आसान नहीं थी उन्हें सफलता के दौरान मानसिक शारीरिक और आर्थिक तीनों परिस्थितियों से जूझना पड़ा था , परंतु इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी कई असफलताओं के बाद भी अपने 9 वें प्रयास में उन्होंने  यूपीएससी की परीक्षा में 659 वीं रैंक हासिल करके अपने आईपीएस अफसर बनने के सपने को पूरा किया है ।

 

लेखिका : अमरजीत कौर

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