नवम्बर 27, 2022

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Success story of IAS Smita Sabharwal in Hindi

22 साल में आईएएस बनी आर्मी अफसर की बेटी, यूपीएससी एग्जाम में इस प्रकार हासिल की ऑल ओवर इंडिया में 4th रैंक

भारत में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कई अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं , जिसमें आज महिलाओं की सफलता की दर काफी अधिक बढ़ती जा रही है।

इस प्रकार कई महिलाओं ने यूपीएससी की परीक्षा को पास कर आईपीएस अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाई है और इनमें से एक आईपीएस अधिकारी है स्मिता सभरवाल , जिन्हें जनता की अधिकारी माना जाता है ।

पिता है रिटायर्ड सेना अधिकारी

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि स्मिता सभरवाल मूल रूप से पश्चिम बंगाल दार्जिलिंग की रहने वाली है । स्मिता के पिता प्रणब दास भारतीय सेना में कर्नल के पद से रिटायर हो चुके हैं, पिता की नौकरी के कारण स्मिता अलग-अलग शहरों में पली बढ़ी है इसके कारण उनकी स्कूली शिक्षा भी कई अलग-अलग स्कूलों में हुई है ‌।

12वीं में किया था टॉप

स्मिता सभरवाल शुरू से ही पढ़ाई में काफी अच्छी थी उन्होंने अपने 12वीं के बोर्ड में ISC बोर्ड में टॉप किया था, इस दौरान ही उनके पिता ने उन्हें सिविल सर्विस की तैयारी करने के लिए काफी अधिक प्रोत्साहित किया था। स्मिता ने अपने ग्रेजुएशन की पढ़ाई कॉमर्स के विषय में पूरी की है।

पहले प्रयास में हासिल हुई असफलता

स्मिता ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करनी शुरू कर दी , परंतु वह अपने पहले प्रयास में सफल नहीं हो पाई ।

22 वर्ष की उम्र में बनी आईएएस

पहले प्रयास में असफलता हासिल होने पर स्मिता ने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत और लगन से एक बार फिर से वर्ष 2000 में यूपीएससी का एग्जाम दिया और पूरे भारतवर्ष में चौथी रैंक हासिल कर केवल 22 वर्ष की उम्र में आईपीएस अधिकारी बन गई।

रोजाना करती थी 6 घंटे पढ़ाई

स्मिता ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई कॉमर्स के विषय में की थी परंतु फिर भी उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में अपना विशेष विषय मानव विज्ञान और लोक प्रशासन को चुना था ।

परीक्षा की तैयारी के बारे में बताते हुए स्मिता कहती है कि यूपीएससी की पढ़ाई करने के दौरान वह रोजाना 6 घंटे पढ़ती थी और स्पोर्ट्स एक्टिविटी के लिए एक घंटा अलग से निकालती थी अन्यथा करंट अफेयर्स के लिए वह न्यूज़ पेपर और मैगजीन का सहारा लेती थी।

आज स्मिता सभरवाल की यह कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है और कई लोग इस आईपीएस अधिकारी की रणनीति से अपनी रणनीति को और भी अधिक मजबूत कर सकते हैं।

लेखिका : अमरजीत कौर

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