दिसम्बर 5, 2022

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Sukirti madhav UPSC Success story in Hindi

Sukirti madhav UPSC Success story in Hindi

लाखों की नौकरी छोड़ सिविल सर्विस में आने का फैसला किया, अपराधी इस आईपीएस के नाम से काँपते हैं

Sukirti madhav UPSC Success story in Hindi :-

भारत की सबसे लोकप्रिय परीक्षाओं में सिविल सर्विसेज परीक्षा गिनी जाती है। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित होने वाले सिविल सर्विसेज परीक्षा को लेकर युवाओं के मन में अलग ही जुनून आप देख सकते हैं।

हर साल लाखों की संख्या में इस परीक्षा में अभ्यर्थी शामिल होते हैं, जिनमें से कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों को ही सफलता मिल पाती है। यूपीएससी परीक्षा को लेकर लोगों के मन में कई तरह की धारणाएं हैं।

जैसे कि यूपीएससी की परीक्षा को पास करने के लिए अच्छी अंग्रेजी होना जरूरी है। लेकिन जैसा माना जाता है क्या यह पूरा सच नहीं है। यूपीएससी परीक्षा को पास करने के लिए अंग्रेजी आना बहुत जरूरी नहीं है।

आपको सामान्य अंग्रेजी का ज्ञान होना आवश्यक है क्योंकि मुख्य परीक्षा में एक प्रश्न पत्र अनिवार्य अंग्रेजी का होता है। इसके अलावा आप किसी भी भाषा में अपने परीक्षा दे सकते हैं और इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।

आज हम जानेंगे एक ऐसे आईपीएस अधिकारी के बारे में जिसमें 12वीं तक की पढ़ाई हिंदी मीडियम से की थी। इसके बाद उसने लाखों की नौकरी छोड़कर यूपीएससी सिविल सर्विसेज में आने का फैसला किया। आज वह एक आईपीएस है और अपराधी उनके नाम से ही कांपने लगते हैं।

जी हां हम बात कर रहे हैं आईपीएस सुकीर्ति माधव मिश्रा की कहानी के बारे में। आईपीएस सुकीर्ति माधव यूपी के शामली जिले में बतौर एसपी तैनात हैं।

वह मूल रूप से बिहार के जमुई जिले के मलयपुर गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता एक सरकारी स्कूल में सरकारी अध्यापक है, जो अब रिटायर हो गए हैं।

एक इंटरव्यू के दौरान सुकीर्ति अपने तथा अपने परिवार के बारे में काफी कुछ बताया। उन्होंने बताया कि एक वक्त ऐसा भी था जब उनके परिवार के पास आर्थिक तंगी थी।

घर में पैसे की कमी होने के कारण कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आर्थिक स्थिति बेहतर न होने के कारण सुकीर्ति माधव ने दसवीं तक की पढ़ाई गांव की सरकारी स्कूल से की। इसके बाद वह 12वीं की पढ़ाई के लिए जमुई चले गए।

जहां पर उन्होंने 12वीं की पढ़ाई की। इसी तरह से 12 वीं तक कि उनकी पढ़ाई हिंदी माध्यम से हुई। 12 वीं की परीक्षा को पास करने के बाद वह बीटेक करने के लिए आईआईआईटी भुनेश्वर में एडमिशन लिया और पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित एनआईटी से उन्होंने बीटेक करने के बाद एमबीए की पढ़ाई की।

इसके बाद सुकीर्ति माधव को कैंपस प्लेसमेंट के जरिए कोल इंडिया में सिलेक्शन हो जाता है। जहां पर उन्हें 15 लाख का सालाना पैकेज मिला था।

लेकिन उनका परिवार चाहता था कि वह सिविल सर्विस में जाये। सुकीर्ति माधव खुद भी एक ऐसी नौकरी करने की इच्छा रखते थे जिससे वह लोगों की मदद कर सके।

इसलिए उन्होंने कैंपस प्लेसमेंट के दौरान मिली 15 लाख की नौकरी के ऑफर को स्वीकर कर तो लिया पर साथ मे यूपीएससी तैयारी करने का फैसला कर लिया।

नौकरी के साथ की तैयारी

सुकीर्ति माधव ने यूपीएससी तैयारी की शुरुआत नौकरी करने के साथ-साथ की। साल 2014 में पहली बार वह यूपीएससी की परीक्षा में शामिल हुए और पहली ही बार में उनका चयन आईआरएस पद के लिए हो गया।

लेकिन वह आईपीएस बनने की इच्छा रखते थे। साल 2015 में उन्होंने फिर से परीक्षा दी। इस बार उन्हें 200 रैंक मिली और उन्हें उनका मनचाहा पद आईपीएस मिल गया।

कोचिंग के बजाज सेल्फ स्टडी पर किया भरोसा

सुकीर्ति माधव ने बताया कि उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा बिना किसी कोचिंग के ही दो दो बार क्लियर किया। वह एग्जाम के लिए कोचिंग से ज्यादा सेल्फ स्टडी को इंपॉर्टेंट मानते हैं।

वह कहते हैं कि यूपीएससी परीक्षा को पास करने के लिए कोचिंग ज्वाइन करना जरूरी नहीं है। यह अभ्यार्थी पर निर्भर करता है कि उसे कोचिंग की जरूरत है अथवा नहीं।

तेजतर्रार आईपीएस ऑफिसर के तौर पर हैं पहचान

सुकीर्ति माधव की पहचान एक तेजतर्रार आईपीएस ऑफिसर के रूप में है। साल 2015 की परीक्षा को पास करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर के रूप में मिला।

उनकी पहली पोस्टिंग मेरठ में हुई। इसके बाद से अब तक उन्होंने मेरठ, प्रयागराज, लखनऊ, बनारस में भी अपनी सेवाएं दी है। इस समय वह शामली के एसपी के द्वार पर तैनात हैं।

उन्होंने तमाम चर्चित केस को सुलझाया है। सुकीर्ति माधव की शामली तैनाती के बाद गैंगस्टर और बदमाशों खुद ब खुद डर के मारे सरेंडर कर दिया था।

परिवार का था साथ

सुकीर्ति माधव कहते हैं कि हम लोग अक्सर गांव में आईएएस आईपीएस अधिकारी के बारे में सुनते व देखते हैं। बचपन से ही इस बात का एहसास होता है कि अधिकारी बनना काफी अलग है और काफी कुछ किया जा सकता है।

वह कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता की इच्छा के अनुसार सिविल सर्विसेज में आने का फैसला किया और उनकी खुद की इच्छा आईपीएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करने की थी।

यही वजह थी कि जब पहली बार उन्होंने एग्जाम देने का फैसला किया तो उन्हें उनके परिवार का पूरा साथ मिला।

वह बताते हैं कि बिना परिवार के साथ किया सफलता हासिल नही की जा सकती थी। आज वह कामयाब है तो इसके पीछे उनके परिवार का महत्वपूर्ण योगदान है।

 

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