नवम्बर 27, 2022

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Mathematics guru R k Srivastava ki kahani

जानते हैं बिहार के आर. के सर के बारे में , जो मात्र रु 1 लेते हैं ट्यूशन फीस, अब तक 545 छात्रों को बना चुके हैं इंजीनियर

गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय

 बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय!!!

 

कवि कबीर द्वारा लिखे हुए गुरु के गौरव में यह शब्द आज भी उतने अनमोल लगते हैं जब बिहार के आर. के श्रीवास्तव जैसे किसी भी शख्स की कहानी सुनते हैं ।

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि बिहार के आर के श्रीवास्तव ( R.K. Srivastava )  लगभग 15 साल से उन बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं जिनके पास  मेहनत और जज्बा तो है ही परंतु आगे बढ़ने के लिए पैसे नहीं है अर्थात जीवन में सफलता के लिए कोई राह दिखाने वाला नहीं है ।

जानकारी के लिए आप सभी को बता दे कि आर.के श्रीवास्तव सर अपने गांव में स्पेशल क्लासेस चलाते हैं , अर्थात इनकी स्पेशल क्लासेज दुनिया भर में “एक रुपए की दक्षिणा” वाली क्लासेस के नाम से जानी जाती है ।

बिहार के रहने वाले आर.के श्रीवास्तव सर गणित विषय के प्रसिद्ध सर हैं , अर्थात वह बच्चों को देश के प्रसिद्ध मेडिकल कॉलेज एवं इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेने में पूरी तरह से मदद करते हैं , अर्थात उनकी क्लासेस में आकर शिक्षा ग्रहण करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को मात्र ₹1 दक्षिणा के रूप में देना होता है ।

वैसे तो आर.के श्रीवास्तव ने अपनी इन क्लासेस  की शुरुआत केवल गरीब बच्चों के लिए की थी परंतु आज समय बीते जा रहा है और इस दौरान उन्होंने अमीर और गरीब का फर्क भूलकर सभी प्रकार के बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं , एवं सभी से मात्र ₹1 गुरु दक्षिणा के रूप में लेते हैं ।

बातचीत के दौरान आर. के सर काफी मजाकिया अंदाज में बताते हैं अब तो मैं विद्यार्थियों से ₹1 दक्षिणा तभी लेता हूं जब उनका एडमिशन उनके मन चाहे कॉलेज में हो जाता है ।

अपने जीवन में इस तरह का नेक कार्य करने के पीछे आर के सर की कहानी बेहद ही खास है ।

बचपन से एक शिक्षक बनना चाहते थे आर.के सर

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि आज के सर मूल रूप से रोहतास जिला के बिक्रमगंज के रहने वाले हैं अर्थात आर. के सर का पूरा नाम रजनीकांत श्रीवास्तव है , काफी छोटी उम्र में इन्होंने अपने पिता को खो दिया था जिसके बाद इनका जीवन काफी सामान्य रहा अर्थात इनका घर पुश्तैनी खेती से चलता था ।

इसके कुछ समय बाद आर.के सर के बड़े भाई ने घर खर्च निकालने के लिए एक ऑटो खरीद लिया , आर के सर बताते हैं कि उन्होंने बचपन में गरीबी को काफी करीब से देखा है अर्थात वह यह बात भली भांति जानते हैं शिक्षा ही वह कुंजी है जो गरीब बच्चों को उनका भविष्य बेहतर बनाने के लिए मदद कर सकती हैं।

और यही कारण था कि वह बचपन से ही काफी कड़ी मेहनत के साथ मन लगाकर पढ़ाई किया करते थे अर्थात् बचपन से ही उनका पसंदीदा विषय गणित और विज्ञान रहा है  , आरके सर ने अपनी दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद एक आम युवा की तरह इंजीनियर बनने का सपना देखा था ।

परंतु जैसे की हम सभी जानते हैं कि जीवन में कुछ अच्छा करने से पहले हमें बड़ी परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है कुछ इसी प्रकार आर.के सर जीवन में भी घटित हुआ ।

वर्ष 2004 में आर.के सर अपनी 12वीं की परीक्षा के साथ ही साथ IIT मैं प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थे, परंतु एग्जाम से कुछ दिनों पहले ही उन्हें टीबी की बीमारी हो गई जिसके बाद उन्हें तीन चार महीने घर पर ही आराम करना पड़ा गया था ।

आर के सर बताते हैं कि यही समय था जब मैं घर पर आराम करने की स्थिति में उन्होंने आसपास के बच्चों को शिक्षा देना शुरू किया था , इस दौरान वह बताते हैं कि यही समय था जब उन्होंने यह निश्चित कर लिया था कि उन्हें आगे चलकर एक शिक्षक बनना है ।

इस प्रकार शुरू हुई ₹1 दक्षिणा वाली क्लासेस

आर के सार खुद एक गरीब परिवार से थे इसलिए उन्हें ज्ञात थी कि अधिक बच्चे होनहार होते हैं परंतु वह कई कारणों से आगे नहीं बढ़ पाते हैं इसलिए उन्होंने उन्हें राह दिखाने का निश्चय किया। अर्थात अगर वर्ष 2004 मैं वह IIT की प्रवेश परीक्षा पास कर लेते तो शायद आज यह कार्य नहीं कर पाते ।

आर के सर ने वर्ष 2009 में गणित के विषय में मास्टर की डिग्री हासिल की , इसके साथ ही साथ बच्चों को पढ़ाना भी जारी रखा , आर.के सर की कोचिंग की क्लास 2008 में ही शुरू हो गई थी । अर्थात वह इस समय 10वीं और 12वीं के बच्चों को प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवाते थे और मात्र एक रुपए गुरु दक्षिणा लेते थे ।

शुरुआत में उनकी इस कोचिंग क्लास में आसपास के बच्चे पढ़ने आते थे परंतु समय के साथ-साथ दूर-दूर से कई बच्चे उनकी इस एक रुपए वाली गुरु दक्षिणा की क्लासेस में शिक्षा लेने आने लगे।

यूं तो वह बताते हैं कि मेरे पास दूर-दूर से आने वाले बच्चों के लिए रहने और खाने का इंतजाम नहीं था परंतु अगर कोई बच्चा काफी करीब परिवार से रहता तो मैं उसकी अवश्य मदद करता था ।

अब तक बिहार के आर के सर अपनी ₹1 की गुरु दक्षिणा वाली क्लासेस में विद्यार्थियों से ₹1 की फीस लेकर  अपनी शिक्षा के बल पर 545 विद्यार्थियों को इंजीनियर कॉलेज में प्रवेश दिलवा चुके हैं ।

आर के सर अपनी एक रुपए की दक्षिणा वाले क्लासेस के लिए इनका नाम वर्ल्‍ड बुक आफ रिकार्ड्स लंदन में दर्ज किया गया है अर्थात इन है पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है अर्थात इन्हें इनके उच्च कार्य के लिए  कई पुरस्कारों से नवाजा गया है ।

 

लेखिका : अमरजीत कौर

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