नवम्बर 27, 2022

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Ranchi Manoj Ranjan roadside garden

आइए जानते हैं रांची के एक ऐसे परिवार के बारे में जिन्होंने, घर मैं जगह ना होने पर रोड पर तैयार कर दिया गार्डन

आज हम बात करने वाले हैं रांची के रहने वाले मनोज रंजन के बारे में , मनोज रंजन को बचपन से ही गार्डनिंग का काफी अधिक शौक था , परंतु जब मनोज रंजन की नौकरी लगी तो उनका पूरा परिवार रांची में आ गया और शहर के घर में पौधे लगाने की बिल्कुल भी जगह नहीं थी ।

इस दौरान उन्होंने पिछले 5 वर्षों से घर के बाहर रोड साइड पर पौधे लगाने शुरू किए और आज 200 से अधिक पौधे लगाकर हरियाली अधिक फैला दी है ।

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि मनोज रंजन पेशे से एक शिक्षक है , हरमू के हाउसिंग कॉलोनी के रहने वाले मनोज रंजन को बचपन से ही गार्डनिंग से काफी लगाव था परंतु उनके घर पर पेड़ पौधों को लगाने के लिए उतनी अधिक जगह नहीं थी।

इसके साथ ही साथ मनोज रंजन कहते हैं कि ” जहां चाह वहां राह”  अर्थात वह जिस जिस स्कूल में पढ़ते थे अपने शौक को पूरा करने के लिए वहां पर अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाते थे , अर्थात मनोज की घर पर एक गार्डन तैयार करने की चाहत करीब पिछले 5 वर्षों पहले पूरी हुई है जब उन्हें घर के बाहर रोड साइड पर गार्डन तैयार करने का ख्याल आया था।

बातचीत के दौरान मनोज बताते हैं कि वह पहले अपने पिता के साथ गांव में रहा करते थे इस दौरान उनके पिता घर पर काफी पेड़ पौधे लगाया करते थे इस दौरान वह अपने पिता की मदद करते और पेड़ पौधे लगाने के कई तरीके भी जानते थे । परंतु मेरी नौकरी के सिलसिले में

मेरा पूरा परिवार रांची शहर आ गया इस दौरान हम जिस घर पर रहते थे उस में पौधे लगाने की बिल्कुल भी जगह नहीं थी , परंतु आज घर के बाहर रोड साइड में एक गार्डन है जहां पहले लोग कचरा फेंकते थे परंतु आज उसी जगह पर रुक कर लोग सेल्फी लेना पसंद करते हैं ।

इस प्रकार तैयार हुआ रोडसाइड गार्डन

मनोज बताते हैं कि रोडसाइड गार्डन तैयार करना उनके और उनके परिवार के लिए इतना आसान नहीं था सभी मिलकर पौधों को लगाते हैं और बाहर के लोग उस पौधों को तोड़ कर ले जाते थे अन्यथा उन्होंने पौधे लगाने बंद नहीं किए बल्कि

और अधिक पौधे लगाने शुरू कर दिए उन्होंने एक खास बात का ध्यान रखा कि वह पौधे लगाने के लिए घर के कबाड़ से चीजों का इस्तेमाल करके उन्हें गमलों के रूप में इस्तेमाल करते और उनमे पौधे लगाते ताकि कोई लोग उसे ले भी जाए तो उन्हें अफसोस ना हो ।

मनोज रंजन बताते हैं कि धीरे-धीरे जब पौधों की संख्या बढ़ने लगी तो पौधों ने भी अपना प्यार देना शुरू कर दिया इतनी खूबसूरत फूलों को देख कर आसपास के लोग भी हमें पौधे और कटिंग लाकर देने लगे थे।

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि मनोज के परिवार ने रोड साइड पर 10/4 की जगह में ही 200 से अधिक पौधे लगाए हैं , मनोज कहते हैं कि जिस रोड साइड पर हमने पौधे लगाए हैं वहां पर पहले से ही एक बड़ा पेड़ था इसलिए इतनी अधिक धूप नहीं आती अर्थात हमने उस प्रकार के ही पौधे लगाए हैं जिन्हें ज्यादा धूप की आवश्यकता  हो ।

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि इस रोड साइड गार्डन में आपको मौसम फूल और सजावटी फुल देखने को मिल जाएंगे अर्थात मनोज और उनके परिवार ने ऐसे कोई भी फूल नहीं लगाए हैं जिनका इस्तेमाल धार्मिक कार्यों में किया जाए अन्यथा ना ही कोई व्यक्ति इसे तोड़ पाएंगा, मनोज रंजन अपने परिवार के किसी भी सदस्य को यहां से फूल तोड़ने नहीं देते वह नहीं चाहते कि गार्डन की खूबसूरती खराब हो ।

मनोरंजन बताते हैं कि भले ही गार्डन घर पर नहीं है परंतु वह इस रोड साइड गार्डन की खूबसूरती बढ़ाने का पूरा प्रयास करते हैं अर्थात मनोज की दोनों बेटियां अनन्या और मनीषा दुबे इस गार्डन को सजाने में पूरी रुचि दिखाती है अर्थात इन्होंने गार्डन में रंग-बिरंगे ईटों और घर के बेकार सामानों का इस्तेमाल करके इस गार्डन की खूबसूरती और अधिक बढ़ा दी है ।

इतना ही नहीं मनोज के रोड साइड गार्डन को देखकर आसपास के कई लोग अपने घर में पेड़ पौधे लगाना शुरू कर दिए हैं अर्थात कई लोग मनोज से प्रेरणा भी लेते हैं कि किस प्रकार उन्होंने घर की कबाड़ का इस्तेमाल करके इतना खूबसूरत गार्डन तैयार किया है ।

मनोज बताते हैं कि शुरुआत में जब उन्होंने रोड साइड पर पौधे लगाने शुरू किए थे तब उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनका यह रोड साइड गार्डन इतना खूबसूरत तैयार हो जाएगा और परिवार वालों के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी इतना अधिक पसंद आएगा ।

 

लेखिका : अमरजीत कौर

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