नवम्बर 30, 2022

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लॉकडाउन में आया गार्डनिंग का आइडिया, साल भर में बन गया मुनाफे का बिजनेस

आइए जानते हैं पटना के रहने वाले रेवती रमन और उनकी पत्नी अंशु सिन्हा से जिन्होंने गार्डनिंग को अपना बिजनेस बना लिया और आज वह लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं।

करोना महामारी के दौरान जब देश भर में लॉकडाउन लग गया था तो सभी लोग अपने घर के अंदर बंद होकर कई कुछ कर रहे थे। कई लोग नए-नए प्रकार के स्वादिष्ट खाने बना रहे थे तो कई अपने बिजनेस का आईडिया तलाश रहे थे।

बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले एक ऐसे दंपति जिन्होंने करोना महामारी के दौरान लॉकडाउन के समय में गार्डनिंग अपने शौक के साथ करना शुरू किया था। परंतु आज वही गार्डनिंग का शौक इनका बिजनेस बन गया है।

इतना ही नहीं दोनों दंपत्ति अपनी गार्डनिंग के साथ एक नर्सरी भी चला रहे हैं और तकरीबन प्रतिदिन 600 से अधिक तरह-तरह के पौधे लोगों को बेचते हैं।

यह कहानी है पटना के कंकड़बाग में रहने रहने वाले एक ऐसे दंपत्ति की जिन्होंने लोकडाउन के दौरान शौक से गार्डनिंग करने की शुरुआत की थी परंतु समय बीते बीते यही गार्डनिंग का शौक इनका बिजनेस बन गया।

लॉकडाउन के दौरान रेवती रमन और उनकी पत्नी अंशु सिन्हा ने ऑनलाइन यूट्यूब से अनेक प्रकार की गार्डनिंग की बारीकियां सीखी और अन्य प्रकार के सजावटी फूल और पौधों को लगाना शुरू किया। इस काम में पति पत्नी ने साथ में मिलकर काम किया।

रेवती रमन बताते हैं कि गार्डनिंग से पूरा जुड़ने का श्रेय वह अपनी पत्नी अंशु सिन्हा को देते हैं। वह कहते हैं कि जब करोना  महामारी के दौरान हम सभी घर पर थे तब मेरी पत्नी अंशु सिन्हा छत पर अलग-अलग प्रकार के पौधों को लगाती थी।

इसके बाद ही  रेवती रमन कहते हैं कि पत्नी की मदद करने के लिए मैं गार्डनिंग के वीडियो यूट्यूब पर देखने लगा और देख देख कर काफी कुछ सीख लिया और फिर अपनी पत्नी की मदद करने लगा।

इसी दौरान पत्नी अंशु सिन्हा कहती है कि हालांकि शुरुआत में मुझे इनसे मेरी मदद करने के लिए कहना पड़ता था परंतु आज वह गार्डनिंग के मामले में मुझ से अधिक रूचि रखते हैं और पेड़ पौधों को सबसे अधिक प्यार करते हैं।

अंशु सिन्हा बताती है यह बेहद हास्य की बात है परंतु मेरी मदद के लिए मेरे पति ने लॉकडाउन में  लगभग 1000 से अधिक गार्डनिंग वीडियो देखे होंगे।

 

घर की बड़ी छत का गार्डनिंग के लिए किया अच्छा उपयोग

अंशु बताती है कि वह बचपन से ही अपने नाना के क्वार्टर में पेड़ पौधे उगआती थी। शादी के बाद अंशु अपने पति के साथ गुड़गांव में रहने लगी और वहां पर भी उन्होंने कुछ सजावटी पौधे उग आए थे। अंशु बताती है कि उन्हें गार्डनिंग का शौक बचपन से ही रहा है।

अंशु बताती है कि कुछ समय के लिए पटना आ गई और वहां शिक्षक की नौकरी करती थी और कुछ समय बाद उनके पति भी पटना आ गए और साइबर का बिजनेस शुरू कर लिया परंतु लॉकडाउन होने के बाद दोनों का काम बंद हो गया उसके बाद मैंने छत पर फूलों को उगाना शुरू कर दिया।

अंशु बताती है कि लॉकडाउन के समय में जब हमारा काम बंद हो गया तो छत पर हमने फूल तो उगाना शुरू किए ही साथ ही साथ हमने गमलों में मौसमी सब्जियों का भी उत्पादन करना शुरू किया।

अंशु बताती है कि 12 स्क्वायर की छत पर उन्होंने कई किस्म के फूल उगाए जिसमें सदाबहार फूल और गुलहड़ के कई किस्म भी मौजूद है।

जानकारी से पता चला है कि अगर इस दंपत्ति के छत पर आप जाते हैं तो आपको कई किस्म के पौधे जैसे गुलाब, लिली, मेंडविलिया,बोगनवेल,एक्जोरा,चांदनी,बेली, लिली इत्यादि कई पौधे मिल जाएंगे।

गार्डनिंग के शौक को बना लिया बिजनेस

जानकारी से पता चला है कि इन की छत पर इतने अधिक पौधे हो गए कि उन्होंने उन्हें कटिंग करके मदर प्लांट तैयार कर दिया और अपनी छत पर छोटी सी नर्सरी बना ली। अंशु ने अपनी नर्सरी में सभी पौधों की कीमत कम से कम रखने की कोशिश की।

रेवती रमन बताते हैं कि उन्होंने अपने नर्सरी में पौधों की कीमत 200 से अधिक नहीं रखी थी। इसी के साथ रेवती रमन कहते हैं कि मैंने और मेरी पत्नी ने नर्सरी का काम बांट कर करने का प्रयास किया।

रेवती रमन बताते हैं कि मेरे साथ मेरे पिता और दो भाई भी रहते थे अगर मैं और मेरी पत्नी बिजी हो जाते तो मेरे पिता आकर पौधों की देखभाल करते और कभी जरूरत पड़ने पर मेरे दोनों भाई आकर नर्सरी संभालते थे।

किस प्रकार ग्राहकों से जोड़कर करती है बिजनेस

जानकारी के लिए आप सभी को बता दें कि रेवती रमन और अंशु सिन्हा द्वारा लॉकडाउन के दौरान अपने शौक के लिए गार्डनिंग का शुरू किया गया कार्य सोशल मीडिया पर जब पहुंचा तो यह एक बिजनेस बन गया।

लोग सोशल मीडिया पर इनकी नर्सरी को पसंद करने लगे और इनके पौधों की खरीदी शुरू हो गई लोग इन्हें व्हाट्सएप कर अपने पौधे को बुक करते हैं और यह उन्हें पौधे डिलीवरी कर देते हैं।

इसके साथ ही साथ जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह किचन मैं इस्तेमाल किए जाने वाले तत्वों से ऑर्गेनिक खाद भी बनाते हैं।

फिलहाल यह दंपत्ति अपनी जानकारी लोगों तक पहुंचाते हैं और पौधे उगाने में लोगों की मदद भी करते हैं और साथ ही साथ अपना गार्डनिंग का बिजनेस भी चलाते हैं।

यह दोनों अपने पौधों को बेचने के बाद लोगों से फीडबैक तो मांगते ही हैं इसके साथ ही साथ अगर उन्हें पौधों से जुड़ी कोई परेशानी हो तो उनका हल भी करके देते हैं।

रेवती रमन बताते हैं कि भले ही हमने गार्डनिंग शौक से शुरू की थी परंतु या बिजनेस बनने के बाद 1 साल में हमारे 600 से अधिक पौधे बिक जाते हैं और हमारी अच्छी कमाई हो जाती है। यह केवल पौधे ही नहीं बल्कि गमले और खाद भी अपनी नर्सरी में बेचते हैं।

अंत में अंशु सिन्हा बताती हैं कि हमारा बिज़नस इतना अधिक बढ़ने लगा कि छत की जगह हमारे लिए छोटी पड़ने लगी तब हमने तुरंत ही एक जमीन लेकर उसमें नर्सरी का काम शुरू कर दिया।

इसके साथ ही साथ करोना के समय हरा भरा वातावरण आसपास होना काफी अच्छा होता है क्योंकि इससे फ्रेश ऑक्सीजन भी प्राप्त होता है जो किसी भी बीमारी को रिकवर करने के लिए अच्छा होता है।

लेखिका : अमरजीत कौर

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